लोकसभा में सीटों को 50% तक बढ़ाने के प्रस्ताव से दक्षिण-पूर्वोत्तर और पश्चिमी राज्यों को नुकसान होने का दावा कांग्रेस ने किया…

वर्तमान बजट सत्र में संसद-विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था 2029 से लागू करने के लिए प्रस्तावित संविधान संशोधन बिल लाने के इरादे को सरकार ने फिलहाल चाहे टाल दिया हो मगर लोकसभा में सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत का इजाफा करने के प्रस्ताव पर सियासी बहस तो शुरू हो ही गई है।

मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने दावा किया कि है कि लोकसभा की वर्तमान सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत बढ़ोतरी के लिए एक विधेयक जबरन पारित कराने की मोदी सरकार तैयारी कर रही है। पार्टी के अनुसार इस प्रस्तावित बिल के पारित होने से चाहे हर राज्य की वर्तमान लोकसभा सीटों की संख्या में 50 फीसद बढ़ जाएगी मगर इस कदम से विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों के साथ पूर्वोत्तर और पश्चिम के छोटे राज्यों को नुकसान होगा।

महिला आरक्षण लागू करने के लिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के फार्मूले पर आधारित विधेयक लाने के सरकार के इरादों की चर्चा करते हुए कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश ने बुधवार को एक्स पर पोस्ट में कहा कि सभी राज्यों में लोकसभा सीटों में एक समान 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी को न्यायसंगत बताने का तर्क पूरी तरह भ्रामक है। उनके अनुसार हो सकता है कि अभी अनुपात न बदलें, लेकिन इसके कुछ गहरे असर होंगे जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

लोकसभा में अलग-अलग राज्यों की मौजूदा सीटों की संख्या में अगर कोई भी अंतर बढ़ता है, तो इससे दक्षिण भारतीय राज्यों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए अभी उत्तर प्रदेश के पास 80 सीटें हैं और तमिलनाडु के पास 39 और प्रस्तावित बिल के लागू होने पर यूपी की सीटों की संख्या 120 हो जाएगी, जबकि तमिलनाडु की सीटें अधिकतम 59 तक ही पहुंच पाएगी।

इसी तरह केरल की लोकसभा सीटें 20 से 30 हो जाएंगी जबकि बिहार की सीटें 40 से बढ़कर 60 हो जाएंगी। जयराम के अनुसार कुल मिलाकर दक्षिण के राज्यों को इसमें केवल 66 सीटों का तो उत्तर के राज्यों को 200 सीटों का फायदा होगा।

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि पीएम मोदी एकतरफा एक ऐसा कानून तैयार कर रहे हैं, जिससे दक्षिण, पूर्वोत्तर और पश्चिम के छोटे राज्यों को नुकसान होगा जिस पर तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेडडी पहले ही चिंता जता चुके हैं और जैसे ही यह प्रस्ताव सार्वजनिक होगा संभव है दूसरे राज्य भी इसका विरोध करें।

कांग्रेस के एक अन्य वरिष्ठ नेता चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी ने जयराम की की चिंता से सहमति जताते हुए कहा कि उन्होंने बिल्कुल सही कहा है और दक्षिण, पश्चिम, पूर्व के ही नहीं उत्तर-पश्चिमी राज्य जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली को भी किसी भी प्रस्तावित परिसीमन में नुकसान उठाना पड़ेगा। तिवारी ने कहा कि 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाने का फार्मूला कारगर नजर नहीं आ रहा इसलिए लोकसभा सीटों के परिसीमन के लिए एक नया फार्मूला ढूढ़ना होगा या फिर परिसीमन को फ्रीज करना होगा।

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