इलेक्ट्रानिक्स व आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म से कहा है कि वे मूल कंटेंट बनाने वालों के साथ अपना राजस्व उचित रूप में साझा करे और उन्हें उसकी सही कीमत मिलनी चाहिए।
इन प्लेटफार्म को जागरूक बनना चाहिए और समाज ने जो एक संस्थागत मूल्य का निर्माण किया है, उसके महत्व को भी इंटरनेट प्लेटफार्म को समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर इंटरनेट मीडिया स्वैच्छिक रूप से राजस्व साझेदारी में इस फार्मूले को नहीं अपनाता है तो फिर इसका कानूनी हल निकालना होगा।
डीपफेक को लेकर सरकार गंभीर
कई देशों ने ऐसा किया भी है। गुरुवार को एक कार्यक्रम में वैष्णव ने यह भी कहा कि डीपफेक या सिंथेटिक वीडियो बनाने से पहले उस व्यक्ति की सहमति लेनी चाहिए। इस दिशा में भी इंटरनेट मीडिया को काम करना चाहिए।
इंटरनेट मीडिया के इस युग में दूरदराज इलाके में भी कंटेंट निर्माता है और मूल रूप से उनके बनाए हुए कंटेंट को इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर विभिन्न रूप में चलाकर राजस्व प्राप्त किया जाता है, लेकिन असली कंटेंट निर्माता को इसका उचित लाभ नहीं मिल पाता है।
इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर भारत में सबसे अधिक रील व वीडियो देखे जा रहे हैं। इंस्टाग्राम प्लेटफार्म पर भारत के 40 करोड़ लोग है और इनमें 95 प्रतिशत लोग रील देखते है। वैसे ही फेसबुक और एक्स प्लेटफार्म पर भी 60 प्रतिशत से अधिक लोग रील देखते हैं।
प्लेटफॉर्म की होगी जिम्मेदारी
वैष्णव ने यह भी कहा प्लेटफार्म पर चलने वाले सभी कंटेंट की जिम्मेदारी उस प्लेटफार्म की होगी। ऑनलाइन प्लेटफार्म पर बच्चों की सुरक्षा या अन्य व्यक्ति की भी ऑनलाइन सुरक्षा की जिम्मेदारी प्लेटफार्म की है।
वैसे ही, किसी की आवाज, चेहरा या उसके व्यक्तित्व का इस्तेमाल करके अगर डीपफेक या सिंथेटिक वीडियो बनाया जाता है तो उस व्यक्ति से इजाजत लेना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बड़े बदलाव का समय आ गया है और इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म को समाज के मूल्यों का आदर क रना चाहिए।
हाल ही में वैष्णव ने यह भी कहा था कि जो चीजें फिजिकल रूप से समाज को मंजूर नहीं है, उसे ऑनलाइन में कैसे स्वीकारा जा सकता है।