2011 की जनगणना के बाद देशभर में घुसपैठ के कारण जनसांख्यिकी में हुए बदलावों की प्रकृति, कारण और नतीजों का वैज्ञानिक अध्ययन केंद्र द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों का हिस्सा होगा।
यह समिति जल्द ही सवालों की सूची के साथ सीमावर्ती राज्यों का दौरा शुरू करेगी।
सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता वाली यह उच्च स्तरीय समिति बंगाल, असम, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों के सीमावर्ती जिलों, सीमावर्ती इलाकों, मेट्रो शहरों और औद्योगिक कस्बों का सघन दौरा करेगी और विस्तृत मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करेगी।
यह समिति राज्यों के लिए तैयार किए गए सवालों के आधार पर जरूरी जानकारी मिलने के तुरंत बाद अपना दौरा शुरू करेगी। सरकार ने 26 मई को इस समिति का गठन किया था।
अधिकारियों ने कहा कि समिति के दौरे को ज्यादा सार्थक और संवादपरक बनाने के लिए राज्यों से जानकारी और सुझावों की जरूरत है। समिति मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों और संबंधित विभागों को “विस्तृत प्रश्नावली” भेजने जा रही है, ताकि जल्द से जल्द उनकी प्रतिक्रिया मिल सके। इससे समिति के सदस्यों को सीमावर्ती राज्यों के दौरे की योजना बनाने में मदद मिलेगी।
गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में समिति को जल्द से जल्द अपनी सिफारिशें देने का सुझाव दिया। समिति ने उन्हें बताया था कि वह राज्यों का दौरा करके जमीनी स्तर की प्रत्यक्ष जानकारी हासिल करेगी।