नेपाल में चुनाव के बाद बनी नई सरकार के साथ रिश्तों को आगे बढ़ाने के संकेत देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को नेपाल की जनता और नई सरकार को बधाई दी।
कहा कि भारत अपने पड़ोसी के साथ शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए मिलकर काम करने को प्रतिबद्ध है।
मोदी के इस बयान को नेपाल में उभरते नए राजनीतिक नेतृत्व के साथ काम करने की भारत की तत्परता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
वैसे भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारी चुनाव में प्रचंड बहुमत की तरफ बढ़ चली राष्ट्रीय स्वतंत्रता पार्टी (आरएसपी) के नेता बालेंद्र शाह के पूर्व के भारत विरोधी रुख को लेकर थोड़ा चिंतित हैं लेकिन यह उम्मीद है कि एक बार सत्ता संभालने के बाद वह प्रैक्टिकल अप्रोच अपनाएंगे।
एक दशक बाद स्थिर सरकार बनने की संभावना
भारतीय कूटनीतिज्ञों के लिए सबसे राहत की बात यह है कि नेपाल में लगभग एक दशक बाद एक स्थिर सरकार बनने की संभावना बनी है।
पीएम मोदी ने इंटरनेट मीडिया पर लिखा कि वह नेपाल में शांतिपूर्ण और सफल चुनाव के लिए वहां की जनता और सरकार को हार्दिक बधाई देते हैं।
उन्होंने कहा कि यह नेपाल की लोकतांत्रिक यात्रा का एक ऐतिहासिक पड़ाव है। यह देखना उत्साहजनक है कि नेपाली नागरिकों ने बड़े उत्साह के साथ अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का उपयोग किया।
शांति, प्रगति और समृद्धि के नए आयाम स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक करीबी मित्र और पड़ोसी के रूप में भारत नेपाल की जनता और वहां की नई सरकार के साथ मिलकर साझा शांति, प्रगति और समृद्धि के नए आयाम स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सूत्रों का कहना है कि भारत नेपाल की नई सरकार के साथ संबंधों को आगे बढ़ाने में कोई देरी नहीं करेगा। नई दिल्ली का मानना है कि नेपाल के साथ ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध इतने गहरे हैं कि किसी भी नई सरकार के साथ सहयोग को आगे बढ़ाना दोनों देशों के हित में है।
एक स्थिर सरकार बनने की संभावना को देखते हुए भारत को भरोसा है कि नेपाल की राजनीतिक अस्थिरता की वजह से हाल के वर्षों में द्विपक्षीय कारोबार, कनेक्टिविटी और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग से जुड़ी परियोजनाएं लटकी हुई हैं, जिन्हें अब ज्यादा तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
भारत को लेकर क्या रहा है बालेन शाह का स्टैंड?
हालांकि, नेपाल के अगले पीएम के तौर पर उभरे आरएसपी नेता बालेंद्र शाह का अतीत भारत को लेकर आलोचनात्मक रहा है। उन्होंने पहले ग्रेटर नेपाल जैसे मुद्दों को उठाते हुए भारत के खिलाफ तीखे बयान दिए थे।
इसके अलावा उन्होंने काठमांडू में कुछ समय के लिए बॉलीवुड फिल्मों के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने की बात भी कही थी, जिससे दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। काठमांडू के मेयर के तौर पर बालेंद्र शाह ने ग्रेटर नेपाल का नक्शा अपने कार्यालय में लगाया था। इस नक्शा में भारत के कई क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था।
भारत के खिलाफ उगल चुके है जहर
हालांकि, वह कई मौकों पर कह चुके हैं कि उनका विरोध किसी देश का नहीं बल्कि नेपाल की संप्रभुता व सांस्कृतिक पहचान को बचाने की है। सूत्रों का कहना है कि आरएसपी नेता ने कभी भारत के साथ युद्ध करने, हिंसा करने जैसी बातें नहीं कहीं हैं, जैसा कि नेपाल के कई अन्य राजनेताओं ने पहले कही हैं।
उनकी तुलना श्रीलंका के वर्तमान राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से की जा सकती है जिनके राजनीतिक करियर की शुरुआत भारत विरोध से हुआ था। लेकिन उनकी पार्टी जनता विमुक्ति पेरामुना पार्टी के सत्ता में आने के बाद उनका रवैया बिल्कुल बदला हुआ है।