‘होश में आओ…’ JD वेंस ने नेतन्याहू को दी नसीहत, अमेरिका-इज़रायल रिश्तों पर बयान से मचा हलचल…

अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता (MoU) लागू होने के बाद लेबनान में सैन्य कार्रवाई रोकने और कब्जे वाले इलाकों से पीछे हटने को लेकर इजरायल पर दबाव बढ़ गया है।

एमओयू में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर युद्धविराम तथा क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता के सम्मान की शर्त शामिल है।

पीछे हटने को तैयार नहीं इजरायल

इसके बावजूद इजरायल ने गुरुवार को दक्षिणी लेबनान में अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों का नया नक्शा जारी कर स्पष्ट संकेत दिया कि वह फिलहाल पीछे हटने को तैयार नहीं है।

रॉयटर्स के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में अनिश्चितकाल तक तैनात रह सकती है। गुरुवार को उन्होंने कहा कि जब तक इजरायल की सुरक्षा को जरूरत होगी, तब तक लेबनान में सेना रहेगी।

नेतन्याहू पर नाराज हुए जेडी वेंस

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उनके बयान पर नाराजगी जाहिर की है। न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि इजरायली पीएम को वास्तविकता पहचानने की जरूरत है। उनके साथ जिस तरह की मेरी बात हुई थी, वैसा व्यवहार उनका नहीं दिख रहा।

वेंस ने कहा कि दुनिया में एकमात्र नेता राष्ट्रपति ट्रंप ही हैं, जो इस समय इजरायल के साथ सहानुभूतिपूर्वक खड़े हैं।

वेंस ने आगे कहा कि पिछले कुछ दिनों से इजरायल के जो मंत्री राष्ट्रपति ट्रंप पर हमलावर हैं, उन्हें मैं बता दूं कि पिछले तीन महीने से जो हथियार आपकी मातृभूमि की सुरक्षा कर रहे थे, उनमें से दो तिहाई अमेरिकी हाथों द्वारा बनाए गए थे। इजरायल में यदि कोई ऐसा सोचता है कि उनकी सबसे बड़ी समस्या राष्ट्रपति ट्रंप हैं तो वह होश में आ जाए और हालात की असलियत को पहचाने।

वेंस ने कहा कि अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपना भरोसा बनाया है और इजरायल को अपने सबसे करीबी सहयोगी पर विश्वास रखना चाहिए। उन्होंने समझौते के आलोचक इजरायली मंत्रियों इतामार बेन-ग्विर और बेजालेल स्मोट्रिच का नाम लेते हुए कहा कि आलोचना करने वालों को यह भी बताना चाहिए कि उनका वैकल्पिक समाधान क्या है।

वेंस ने कहा, ‘इजरायल नौ लाख नहीं, बल्कि 90 लाख आबादी वाला देश है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी हर समस्या का समाधान केवल सैन्य कार्रवाई या लोगों को मारकर नहीं निकाला जा सकता।’

अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि इजरायल सरकार में ईरान समझौते को लेकर ‘अनावश्यक घबराहट’ दिखाई दे रही है। उनका कहना था कि इजरायल यह मानकर चल रहा है कि ईरान को हर लाभ मिल जाएगा, जबकि समझौते में स्पष्ट प्रविधान हैं कि यदि तेहरान अपना व्यवहार नहीं बदलता या आतंकी संगठनों को समर्थन जारी रखता है तो उस पर लगे प्रतिबंध नहीं हटाए जाएंगे।

एपी के अनुसार, जमीन पर तनाव अब भी बना हुआ है। दक्षिणी लेबनान में इजरायली हवाई हमले और गोलाबारी में तीन लोगों की मौत हुई है। वहीं, हिजबुल्ला ने भी दो ड्रोन हमले किए हैं, जिनमें पांच इजरायली सैनिक घायल हुए।

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