नागपुर में कॉकरोच जनता पार्टी का अनोखा प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उठी मांग…

कॉकरोच के मास्क पहने और न्याय के लिए नारे लगाते हुए सैकड़ों युवाओं ने नागपुर में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन में भाग लिया।

इस अवससर पर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने युवाओं को धर्म-आधारित राजनीति से दूर रहने की सलाह दी।

प्रदर्शनकारियों ने पिछले महीने हुए नीट (यूजी) पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।

सीजेपी के आह्वान पर प्रदर्शनकारी नागपुर के संविधान चौक पर जमा हुए थे। यहां एकत्र लोगों को संबोधित करते हुए दिपके ने मध्य प्रदेश की नीट उम्मीदवार आकांक्षा चतुर्वेदी की आत्महत्या का जिक्र किया।

आकांक्षा ने पिछले महीने नागपुर में आत्महत्या कर ली थी। दिपके ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कथित “अराजकतावादी” वाले बयान पर भी निशाना साधा। कहा कि यदि नागपुर में आत्महत्या करने वाली आकांक्षा चतुर्वेदी के समर्थन में खड़े होने के लिए वे मुझे अराजकतावादी कह रहे हैं, तो मैं अराजकतावादी हूं। चाहे कुछ भी हो जाए, वह छात्रों के साथ खड़े रहेंगे।

इस बीच, भगवा वेष में आए लोगों के एक समूह ने सीजेपी के खिलाफ नारे लगाए। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर जय श्रीराम भी बोला। इस दौरान उनकी प्रदर्शनकारियों से बहस भी हुई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ नारे लगाए। सीजेपी के विरोध प्रदर्शन से पहले संविधान चौक पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

चुनावी राजनीति में उतरने से किया इनकार

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने चुनावी राजनीति में उतरने से इन्कार किया।

कहा कि नागरिकों को केवल अपने बुनियादी अधिकारों की मांग करने के लिए चुनाव लड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। नीट (यूजी) पेपर लीक को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर बात करते हुए कहा कि उन्हें सबसे पहले उन पांच या छह छात्रों के परिवारों से माफी मांगनी चाहिए, जिन्होंने परीक्षा में गड़बड़ी और उसके बाद परीक्षा रद होने के कारण आत्महत्या कर ली है।

मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि भारत एक ऐसा देश है जो विरोध-प्रदर्शनों के जरिये आजाद हुआ था। विरोध-प्रदर्शनों की वजह से ही यह लोकतंत्र बना हुआ है। यह विरोध-प्रदर्शनों से ही कायम है और एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए यह बहुत अच्छी बात है।

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