CJI सूर्यकांत की अहम टिप्पणी: ‘न्यायपालिका की ताकत जजों, वकीलों और विद्वानों की गुणवत्ता पर निर्भर’…

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि देश की न्यायपालिका की ताकत न्यायाधीशों, वकीलों, विद्वानों और प्रशासकों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है और हर पीढ़ी के कानूनी पेशेवरों के पीछे एक पीढ़ी के शिक्षकों का योगदान होता है।

सीजेआई सूर्यकांत ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में कानून, न्याय और कानूनी शिक्षा पर आयोजित मासिक व्याख्यान श्रृंखला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर प्रसिद्ध शिक्षाविद् प्रोफेसर डा. रणबीर सिंह को वार्षिक ‘सुप्रीम कोर्ट न्याय शिक्षा सम्मान’ का पहला प्राप्तकर्ता बनाया गया।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा, ‘हम अक्सर संविधान को अधिकारों की भाषा, शक्ति की सीमाओं और शासन की संरचनाओं के माध्यम से देखते हैं, लेकिन यह समाज में व्यक्तियों की सार्थक भागीदारी और गरिमा और समानता के साथ अवसरों का पीछा करने के लिए आवश्यक परिस्थितियों को बनाने की एक बड़ी प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।’

उन्होंने व्याख्यान के विषय ‘संविधान को अवसर के चार्टर के रूप में: लोकतंत्र, उद्यम और समावेशी राष्ट्र-निर्माण’ का उल्लेख किया, जिसे प्रोफेसर रणबीर सिंह ने प्रस्तुत किया। सीजेआई ने कहा कि जैसे-जैसे कानून के आयाम विकसित होते हैं और नए प्रश्न उभरते हैं, हर न्यायाधीश, वकील और विद्वान एक न एक रूप में इस अनुशासन का छात्र बना रहता है।

सीजेआई ने कहा, ‘हमारी न्यायपालिका की ताकत, काफी हद तक, इसके न्यायाधीशों, वकीलों, विद्वानों और प्रशासकों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है।’ सीजेआई ने कहा, ‘और हर पीढ़ी के कानूनी पेशेवरों के पीछे एक पीढ़ी के शिक्षक होते हैं जिन्होंने उन्हें कानून की सबसे अच्छी समझ दी, इसके तरीकों और मूल्यों से परिचित कराया, और उन्हें आलोचनात्मक और स्वतंत्र रूप से सोचने के लिए प्रोत्साहित किया।’

सीजेआई ने कहा कि उनके पिता ने अपने कार्य जीवन को एक शिक्षक के रूप में बिताया और उन्होंने उस अनुशासन, तैयारी और प्रतिबद्धता को देखा जो शिक्षण की आवश्यकता होती है।

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