चीन ने अमेरिका को कड़ी नसीहत देते हुए कहा है कि वह चीन खतरे की बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना बंद करे।
यह बयान उस अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें कहा गया था कि चीन अगले साल ताइवान पर हमला करने की संभावना नहीं रखता।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि अमेरिका को ताइवान मुद्दे पर सावधानी से बोलना और कदम उठाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन को चीन को लेकर अपनी सोच सुधारनी चाहिए और बेवजह खतरे का माहौल नहीं बनाना चाहिए।
ताइवान मुद्दे पर सख्त रुख
लिन जियान ने साफ कहा कि अमेरिका को ताइवान से जुड़े मामलों में सतर्क रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकते हैं।
चीन लंबे समय से ताइवान को अपना हिस्सा मानता है और इस मुद्दे पर बेहद संवेदनशील रहता है।
चीन ने ईरान के वरिष्ठ नेता अली लारीजानी की हत्या की भी निंदा की है। इजरायल के हवाई हमले में हुई इस हत्या को चीन ने अस्वीकार्य बताया। चीन ने कहा कि किसी भी देश के नेताओं की हत्या और नागरिक ठिकानों पर हमले सही नहीं हैं।
संतुलन बनाने की कोशिश
हालांकि चीन ईरान का करीबी साझेदार है, फिर भी उसने खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों की भी आलोचना की है।
इससे साफ है कि चीन क्षेत्र में अपने संबंधों को संतुलित रखने की कोशिश कर रहा है। चीन ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकें और हालात को और बिगड़ने से बचाएं।
हाल के दिनों में चीन ने मध्य पूर्व में अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। उसके विशेष दूत झाई जुन ने कई देशों के अधिकारियों से बातचीत की है। इन बैठकों में चीन ने कहा कि नागरिक ढांचे को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए और जरूरी समुद्री रास्तों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए।
मानवीय मदद का ऐलान
चीन ने यह भी कहा है कि वह युद्ध से प्रभावित देशों को मानवीय सहायता देगा। इन देशों में ईरान, लेबनान, जॉर्डन और इराक शामिल हैं। इस कदम के जरिए चीन खुद को एक ऐसे देश के रूप में पेश कर रहा है, जो शांति और संयम की अपील करता है।