चीन ने भारत की अध्यक्षता में इस वर्ष आयोजित होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को पूर्ण रूप से सफल बनाने के लिए अपना समर्थन जताया है, हालांकि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के इस सम्मेलन में शामिल होने को लेकर उसने अभी भी स्थिति स्पष्ट नहीं की है।
बीजिंग में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि ब्रिक्स उभरते बाजारों और विकासशील देशों के बीच सहयोग का एक बहुत ही महत्वपूर्ण मंच है।
चीन ब्रिक्स सहयोग को काफी महत्व देता है और इसमें सक्रिय रूप से भाग लेता है। उन्होंने कहा कि हम इस वर्ष के अध्यक्ष देश भारत का समर्थन करते हैं ताकि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पूरी तरह सफल हो सके।
चिनफिंग के भाग लेने पर संश्य बरकरार
हालांकि, जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति शी चिनफिंग इस बैठक में भाग लेंगे, तो वह इस पर सीधे तौर पर कुछ भी कहने से बचती नजर आईं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में फिलहाल उनके पास साझा करने के लिए कोई विशेष जानकारी नहीं है।
मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका से बने इस समूह का दायरा 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल करके बढ़ाया गया था, जबकि इंडोनेशिया भी 2025 में इस समूह का हिस्सा बन चुका है। वर्तमान में इस समूह की अध्यक्षता भारत के पास है और इस वर्ष का यह प्रतिष्ठित शिखर सम्मेलन आगामी 12-13 सितंबर को आयोजित किया जाना है।
इस बीच, भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिसरी की इस सप्ताह हुई चीन यात्रा और चीनी अधिकारियों (जिनमें उप विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग भी शामिल थीं) के साथ उनकी बैठकों पर बात करते हुए माओ ने कहा कि दोनों पक्षों ने कई मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।
उन्होंने बताया कि नेताओं के बीच बनी महत्वपूर्ण आम सहमति को आगे बढ़ाने, राजनीतिक आपसी विश्वास को गहरा करने, विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देने और मतभेदों को ठीक से सुलझाने पर चर्चा हुई। मिसरी, जो पहले चीन में भारत के राजदूत रह चुके हैं, ने अपनी दो दिवसीय यात्रा के दौरान सोमवार को हुआ चुनयिंग से मुलाकात की थी।