अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के बीजिंग दौरे से ठीक पहले चीन ने वार्ता के लिए लक्ष्मण रेखा खींच दी है।
वह ताइवान, मानवाधिकार और चीन के विकास समेत चार मुद्दों पर कोई बातचीत नहीं करेगा। जबकि ट्रंप ने चीन पहुंचने से पहले कहा कि उन्हें ईरान युद्ध समाप्त करने के लिए चीन की मदद नहीं चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति तीन दिवसीय दौरे पर बुधवार को बीजिंग पहुंचे। उनकी चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ गुरुवार को शिखर वार्ता होगी।
‘चीन की मदद की जरूरत नहीं’
रॉयटर्स के अनुसार, बीजिंग के लिए रवाना होने से पहले ट्रंप ने वॉशिंगटन में पत्रकारों से कहा कि उन्हें ईरान में युद्ध खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट पर तेहरान की पकड़ कमजोर करने के लिए चीन की मदद की जरूरन पड़ने की उम्मीद नहीं है।
ट्रंप ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि हमें ईरान के मामले में किसी मदद की जरूरत है। हम इसे किसी ने किसी तरह जीत लेंगे, चाहे शांतिपूर्ण तरीके से या किसी और तरीके से।’
इससे पहले अमेरिका में चीनी दूतावास ने मंगलवार को दो टूक कहा कि ताइवान पर चीन के रुख और उसके विकास के अधिकार समेत चार ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें दखल की गुंजाइश नहीं है।
चीनी दूतावास ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘चीन-अमेरिका संबंधों में चार रेड लाइन को चुनौती नहीं दी जानी चाहिए।’ इस पोस्ट के साथ एक ग्राफिक भी है, जिसमें ताइवान का मुद्दा, लोकतंत्र व मानवाधिकार, राजनीतिक प्रणाली और चीन के विकास के अधिकार बताए गए हैं, जिन पर बीजिंग कोई समझौता नहीं करेगा।
चीनी दूतावास ने एक अन्य पोस्ट में कहा, ‘चीन और अमेरिका को एक रणनीतिक, रचनातमक और स्थिर चीन-अमेरिका संबंध के निर्माण की संभावनाओं को तलाशना चाहिए।’
दूतावास ने आगे कहा, ‘आपसी सम्मान, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और परस्पर लाभकारी सहयोग ही चीन और अमेरिका के बीच बेहतर संबंधों के लिए सही रास्ता है।’
चीनी राष्ट्रपति चिनफिंग ने नवंबर, 2024 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ वार्ता के बाद इन चार रेड लाइन की घोषणा की थी।
ताइवान है सबसे प्रमुख मामला
ताइवान को चीन अपना क्षेत्र मानता है। अमेरिका की तरफ से इसे सैन्य साजो-सामान मुहैया कराए जाने पर वह कई बार नाराजगी जता चुका है। यह माना जा रहा है कि ट्रंप-चिनफिंग वार्ता के दौरान यह मुद्दा उठ सकता है।
ट्रंप प्रशासन ने गत दिसंबर में ताइवान के लिए 11 अरब डालर के हथियारों की बिक्री की घोषणा की थी। चीन को इस बात पर भी आपत्ति है कि अमेरिका लोकतंत्र और मानवाधिकारों के मुद्दे पर उसके आंतरिक मामलों में दखल देता है।
नौ साल बाद चीन के दौरे पर ट्रंप
ट्रंप बुधवार को बीजिंग पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। करीब 300 चीनी युवा नीले और सफेद रंग की ड्रेस में दिखे और चीन-अमेरिका के झंडों के साथ स्वागत-स्वागत और गर्मजोशी के साथ स्वागत बोलते सुने गए।
करीब नौ वर्ष बाद किसी अमेरिकी राष्ट्रपति की यह पहली चीन यात्रा है। ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में 2017 में बीजिंग का दौरा करने वाले अंतिम अमेरिकी राष्ट्रपति थे।
ट्रंप और चिनफिंग की शिखर बैठक में ईरान, ताइवान और व्यापार से लेकर रेयर अर्थ मिनिरल्स, एआइ व परमाणु हथियार जैसे मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है।
चीनी इंटरनेट मीडिया प्लेटफॉर्म पर ट्रंप कर रहे ट्रेंड
एपी के अनुसार, ट्रंप बीजिंग पहुंचने के बाद से चीनी इंटरनेट मीडिया वीबो पर ट्रेंड कर रहे हैं। चीन के सरकारी प्रसारक सीसीटीवी ने बुधवार को एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें ट्रंप विमान से बाहर निकलते और सीढ़ियों से नीचे उतरते दिखाई दिए। इस वीडियो को महज 30 मिनट में 18 हजार से ज्यादा लाइक मिले, जबकि 1300 से ज्यादा कमेंट किए गए।