चीन ने तिब्बत में माउंट एवरेस्ट के पास एक ड्रोन रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर बनाया है। इसका मकसद अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बॉर्डर पेट्रोलिंग, सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट के लिए बिना पायलट वाले हवाई वाहनों (यूएवी) का इस्तेमाल करना है।
तिब्बत 4,000 मीटर से अधिक ऊंचा है। चीनी इंजीनियरों के मुताबिक, ऊबड़-खाबड़ जमीन और तेजी से बदलते मौसम की वजह से इसे ड्रोन टेक्नोलॉजी विकसित करने के लिए आदर्श जगह माना जाता है।
तिब्बत में माउंट एवरेस्ट के पास ड्रोन सेंटर
सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने पहले ही रिपोर्ट दी थी कि तीन जुलाई को शिजांग (तिब्बत) यूनिवर्सिटी में प्लेटो ड्रोन रिसर्च एंड डेवलपमेंट एप्लीकेशन सेंटर शुरू किया गया।
यह अधिक ऊंचाई वाले पठारी इलाकों में बिना पायलट वाले हवाई वाहनों की रिसर्च, डेवलपमेंट और प्रैक्टिकल इस्तेमाल के लिए पूरी तरह समर्पित चीन का पहला प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म है।
उम्मीद है कि यह सेंटर अमेरिका के साथ टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दबदबे की चल रही होड़ में चीन को फायदा पहुंचाएगा। यह सेंटर ऐसे समय में शुरू किया गया है जब अमेरिका और चीन के बीच टेक्नोलॉजी की होड़ तेज हो गई है।
हांगकांग के साउथ चाइना मार्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 2024 से नेपाल की स्थानीय कंपनी एयरलिफ्ट टेक्नोलॉजी चीनी कंपनी डीजेआइ के भारी सामान उठाने वाले ड्रोन का इस्तेमाल कर रही है। इसकी मदद से ऊंचे कैंपों तक चढ़ाई का सामान पहुंचाया जाता है और वहां से कचरा वापस लाया जाता है।