सैयद जावेद हुसैन (सह संपादक – छत्तीसगढ़):
कल तक जो महफ़ूज़ थे ये गलियाँ और चौबारे, अब वहाँ भी ख़ौफ़ का साया है…
धमतरी- ये पंक्ति इन दिनों के शहर के माहौल को बयां कर रही है।
जहां एक समय में शांति थी भाईचारा था एक दूसरे की परवाह थी, आज वहां लोग ख़ौफ़ के साये में अपनी सांसें ले रहे हैं। शहर के सीधे सादे लोगों को हर वक़्त किसी न किसी अप्रिय घटना का अंदेशा लगा रहता है, और ये डर दिन ब दिन बढ़ता चला जा रहा है।
बहरहाल ताज़ा मामले की बात करें तो अभी मुजगहन हत्याकांड और मराठापारा में बदमाशो का उपद्रव समेत गोल बाज़ार से किसान नेता की गाड़ी से पैसों की चोरी ये घटनाएं लोगों के ज़हन से निकली नहीं थी कि फिर शहर के मध्य सिहावा चौक नेशनल हाईवे में बीती रात 4 फुटपाथ की दुकानों में चोरी, चोरी की कोशिश और एक कबाड़ी दुकान में आगज़नी की वारदात ने फिर लोगों की सिहरन को और बढ़ा दिया है।
शहर के अंदरूनी इलाकों में ऐसी घटनाएं तो आम बात थीं लेकिन बीते कुछ महीनों से सिहावा चौक इलाके, नेशनल हाईवे नगरी रोड में चोरी की घटनाएं अप्रत्याशित रूप से बढ़ती जा रही हैं। लेकिन शायद जिम्मेदारों को इन घटनाओं से वो फर्क नहीं पड़ रहा जो किसी बड़े व्यापारिक संस्थानों के ताले टूटने से पड़े!
इन फुटपाथ के दुकानदारों का रेलवे अतिक्रमण से हटाए जाने का दर्द अभी कम भी नहीं हुआ था और अब लगभग हर सप्ताह/महीनों में होने वाली चोरी ने उन्हें परेशान कर डाला है।
रेलवे का अतिक्रमण हटाये जाने के बाद किसी तरह अपना घर चलाने के लिए रेलवे की बाउंड्री से लगी नाली के ऊपर अपना व्यवसाय कर रहे कुतूब ने बताया कि अतिक्रमण हटाए जाने बाद अब तक उनकी दुकान पर ये पांचवीं घटना है जिनमें 2 बार चोरों को कुछ नहीं मिला 2 बार दुकान के गल्ले में रखे ₹500-₹1000 रुपए चोरी हुए, और अब तो हद ही हो गईं बीती रात चोरों-बदमाशाें ने गल्ले से पैसे तो चुराये ही साथ ही दुकान में आग भी लगा दी, जिससे कुतुब को लगभग ₹60 हज़ार की हानि हुई, रात लगभग 3 बजे दमकल की टीम ने आग बुझाया, इसके अलावा उसी लाइन में टिन के घरेलू समान बनाने वाले दुकानदारों और भोला पान ठेले को भी इन बदमाशो ने नहीं बख़्शा, आगे मेहताब सिंह गैरेज के सामने एक ठेले में ऑटोसेंटर का काम करने वाले यूनुस की दुकान से चोरों ने कुछ चिल्हर पैसे और पाना वगैरह भी चोरी कर ले गये। इन तमाम घटनाओं ने कोतवाली पुलिस की रात्रि गश्त की कलई तो खोल ही दी है, साथ ही पुलिसिया व्यवस्था, अपराधों पर नियंत्रण, और अपराधियों के मन से पुलिस का ख़ौफ़ भी मिटाती नज़र आ रही है।
पीड़ित दुकानदारों ने सिटी कोतवाली में मामले की शिकायत की है, साथ ही वे अपनी बात थाना प्रभारी के समक्ष रखने लगभग 2 घंटे उनका इंतज़ार किया लेकिन महोदय की उनसे मुलाकात नहीं हो सकी।
क्या कोतवाली पुलिस इन मामलों पर गंभीर होकर उन बदमाशों के गिरेबान तक पहुंच उन्हें हवालात तक पहुंचाएगी? क्या कोतवाली क्षेत्र के उन तमाम बदमाशों के मन में फिर से पुलिस का ख़ौफ़ होगा? क्या अपराधों पर नियंत्रण होगा? इन तमाम सवालों से लोगों के ज़हन जूझ रहे हैं।