सैयद जावेद हुसैन (सह संपादक – छत्तीसगढ़):
धमतरी- शहर की अंदरूनी सड़कों के अलावा मुख्य मार्गों में जर्जर सड़क से उड़ने वाली धूल ने लोगों को हलाकान कर रखा है। इस समस्या से आज शहर का हर नागरिक परेशान हो चुका है, हद तो ये है कि शहर के अंदर की गलियों तक में इस क़दर धूल उड़ रही है कि व्यापारियों दुकानदारों के अलावा रिहायशी धूल से पनाह मांग रहे हैं।
अब जब बात धूल की निकली है तो नगरी मार्ग और दुर्ग मार्ग कैसे बच सकता है? इन दो सड़कों की स्थिति तो ऐसी है मानो एक बार यहां से गुज़र गए तो फिर आप खुद को भी पहचान नहीं पाएंगे।
अभी बारिश का मौसम गुज़रा ही है, और सभी सड़कें इतनी बदतर हो गईं कि जैसे आप नगर निगम या जिला मुख्यालय में नहीं किसी बहुत बड़े औद्योगिक क्षेत्र या किसी माइंस एरिया में रह रहे हों, शायद यहां विकास उल्टे क़दम चल रहा है।
हालांकि 2 दिनों से जिला प्रशासन सड़क की मरम्मत की विज्ञप्ति ज़रूर भेज रहा, मरम्मत शुरू भी हो गई, लेकिन सवाल ये है कि सड़कें जर्जर हैं तो क्या प्रशासन इस स्थिति में भी नहीं है कि कम से कम सड़कों में नियमित रूप से पानी का छिड़काव ही करवा दें? जिससे धूल न उड़े। कुछ दिनों पहले नगरी मार्ग में एक बड़ा कार्यक्रम हो रहा था उस दौरान नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया गया, लेकिन जैसे ही वो कार्यक्रम ख़त्म हुआ पानी का छिड़काव भी बंद हो गया, मानों उस सड़क से न ही लोगों का आवागमन है और न ही लोगों का निवास? क्या जनता का इतना इम्तेहान लेना ठीक है? इस उड़ती धूल से न जाने कितने ही लोग बीमार पड़ रहे किसी को आँखों की दिक्कत तो कोई सांस का मरीज़ बन रहा।
सड़क निर्माण हो रहा है परेशानी होगी, लेकिन क्या जनता के प्रति ये ही जवाबदेही है उन्हीं के चुने नेताओं की? क्या लाखों जनता के लिए 2 वक़्त पानी का छिड़काव भी नहीं किया जा रहा? नगर के व्यापारी भी आवेदन देकर थक चुके, लेकिन ये कुम्भकर्णीय निद्रा में सोने वाले नौकरशाह और सफेदपोशों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही।
इन सड़कों में राहगीर और रहवासी पूरी बारिश कीचड़ और दलदल नुमा गड्ढों में गिरते रहे, उन्हें लग रहा था कि बारिश के बाद थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन बारिश की विदाई ने उनके सामने धूल की बारात लाकर फिर खड़ी कर दी।
क्या जनता इसी तरह हर बार क्षली जाती रहेगी? आखिर कब तक यहां के नागरिक अपनी समस्याओं से जूझते रहेंगे? ये सवाल शहर और जिले के हर नागरिक के लिए है, आखिर कितना करेंगे आप बर्दाश्त?
बहरहाल यातायात नियम या कानून तोड़ने वालों को फाइन/सज़ा तो दी जाती है तो फिर उन नेताओं और अधिकारियों की भी कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए जिसके कार्यकाल और पोस्टिंग के दौरान उक्त गुणवत्ताहीन सड़क, नाली, भवन आदि का निर्माण किया गया? या निर्माण में देरी की जा रही या फिर जनता के हितों को नज़रंदाज़ किया जा रहा।
अब शहर की जनता ही तय करें कि उसे इसी तरह नेता और नौकरशाहों की मर्जी के आगे नतमस्तक होना है या फिर अपने हितों के लिए आवाज़ उठाना है!