Chhath Puja Katha: द्रौपदी ने किया था छठ व्रत, भविष्योत्तर पुराण और भविष्य पुराण में भी मिलता है छठ कथा का उल्लेख…

प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131

पटना, प्रधान संवाददाता। छठ व्रत की उत्पत्ति के संबंध में जनश्रुतियों, लोक परंपराओं और पुराणों में कई कथाएं प्रचलित हैं। द्रौपदी, सुकन्या और नागकन्याओं द्वारा छठ व्रत करने की कथाएं प्रचलित हैं।

पुराण और लोक परंपरा में प्रचलित कई कथाओं के बारे में बिहार राज्य धार्मिक न्यास पर्षद के पूर्व सदस्य और महावीर मंदिर से जुड़े पं.भवनाथ झा ने बताया। भविष्योत्तर-पुराण के अनुसार जब पांडव जुआ में हारकर वनवास काल व्यतीत कर रहे थे।

तब वे भाइयों के भरण-पोषण के लिए चिंतित थे। इसी बीच 80 हजार मुनि उनके आश्रम में पधारे। उनके भोजन की चिंता में युधिष्ठिर अधिक घबरा उठे।

तब द्रौपदी अपने पुरोहित धौम्य ऋषि से इसका समाधान पूछने लगी। धौम्य ऋषि ने उन्हें भगवान् सूर्य का व्रत रवि-षष्ठी करने का निर्देश दिया।

इसे प्राचीन काल में भी नागकन्या के उपदेश से सुकन्या ने किया था। महाभारत में भगवान् सूर्य द्वारा द्रौपदी को अक्षय-पात्र देने का जो आख्यान है, उसी से इसे जोड़ा गया है।

लोक परंपराओं में छठी मैया की कथा

बिहार की लोक-परंपरा में सूर्य षष्ठी में छठी मैया की पूजा से संबद्ध अनेक गीत तथा लोक-कथाएं प्रचलित हैं। इस परंपरा का संबंध भविष्य-पुराण की एक कथा से है। इसमें कार्तिक मास की षष्ठी तिथि को कार्तिकेय तथा उनकी माता की पूजा का विधान किया गया है।

भविष्य-पुराण के उत्तर पर्व के 42वें अध्याय में कहा गया है कि कार्तिकेय ने इस दिन तारकासुर का वध किया था। इसलिए यह तिथि कार्तिकेय की दयिता कही जाती है। इस अध्याय में इस षष्ठी तिथि को सूर्य की पूजा करने का भी विधान किया गया है।

छह माताओं ने पाला कार्तिकेय को

एक अन्य कथा के अनुसार शिव की शक्ति से उत्पन्न कार्तिकेय को छह कृतिकाओं ने दूध पिलाकर पाला था। अत: कार्तिकेय की छह मातायें मानी जाती हैं।

इसलिए भगवान कार्तिकेय को षाण्मार्तु भी कहा जाता है। इन्हीं छह कृतिकाओं का दूध एक साथ पीने के लिए उन्होंने अपना छह मुख बना लिये थे।

इसी से कार्तिकेय को षडानन, षड्वदन, षण्मुख अर्थात् छह मुंह वाला कहा जाता है। यहां यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कृतिका नक्षत्र छह ताराओं का समूह भी है तथा स्कन्द-षष्ठी नाम से एक व्रत का उल्लेख भी है।

सुकन्या द्वारा छठ करने की कथा :

धौम्य ऋषि ने कहा कि प्राचीन काल में शर्याति नामक एक राजा हुए। उनकी पुत्री सुकन्या की कथा भी प्रचलित है।

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