Chhath Puja 2025: छठ महापर्व की शुरुआत, अनुराधा नक्षत्र और शोभन योग में आज नहाय-खाय सम्पन्न…

प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131

चार दिवसीय छठ महापर्व शनिवार को अनुराधा नक्षत्र और शोभन योग में नहाय-खाय के साथ शुरू होगा।

व्रती गंगा नदी में स्नान के बाद भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर नहाय-खाय प्रसाद बनाएंगे। प्रसाद के रूप में अरवा चावल, चना दाल, कद्दू की सब्जी और आंवले की चटनी आदि को भगवान का भोग लगाकर उसे ग्रहण करेंगे।

वे चार दिवसीय अनुष्ठान का संकल्प लेंगे। ज्योतिषाचार्य पीके युग बताते हैं कि व्रत के दूसरे दिन रविवार की शाम में ज्येष्ठा और मूल नक्षत्र में गुड़ से बने खीर, रोटी, केला आदि खरना प्रसाद के रूप में ग्रहण करेंगे।

खरना प्रसाद ग्रहण करते समय गौ का भाग (ग्रास) निकाल कर व्रती चार दिवसीय अनुष्ठान के लिए गाय को भी साक्षी बनाएंगे। व्रती 36 घंटे के निर्जला उपवास की शुरुआत करेंगे।

ज्योतिषाचार्य पीके युग बताते है कि डूबते और उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्र का जाप बेहद प्रभावी होता है। श्रद्धालु भगवान भास्कर को अर्घ्य अर्पित करते समय ‘ऊॅ घृणि सूर्याय नम:’, गायत्री मंत्र या आदित्य ह्रदय स्रोत का पाठ करना शुभकर होता है।

छठी मइया के भाई के सूर्यदेव : ज्योतिषी अवध बिहारी त्रिपाठी बताते हैं कि मार्केंडय पुराण व बाल्मिकी रामायण के अनुसार सूर्यदेव, छठी मइया के भाई है। बाल्मिकी पुराण के अनुसार रावण वध के बाद रामजी राजसूय यज्ञ किए थे। उस समय मुंगेर में माता सीता गंगा नदी के किनारे छठ व्रत की थी।

मार्केंडय पुराण के अनुसार सबसे पहले छठ व्रत दौपदी ने किया था। जिससे पांडवों का राजपाट जो खो चुके थे वह प्राप्त हो गया था।

उन्होंने पुराण का हवाला देते हुए एक अन्य उदाहरण में बताया कि छठी माता सूर्य की बहन और भगवान ब्रह्मा की मानस पुत्री हैं। कुछ अन्य पुराणों में कात्यायनी देवी को भी छठी मइया कहा गया है। जिसकी पूजा षष्ठी तिथि को किया जाता है। इस दिन ईख चढ़ाया जाता है, क्योंकि सूर्य से इसका संबंध है।

खरना प्रसाद ग्रहण करने के 24 घंटे निर्जला उपवास के बाद महाव्रत के तीसरे दिन शाम (27 ) को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा।

ज्योतिषाचार्य पीके युग के अनुसार इस वर्ष अस्ताचलगामी सूर्य को ‘पूर्वाषाढ़ा’ नक्षत्र और मंगलवार को उगते हुए सूर्य को ‘उत्तराषाढ़ा’ नक्षत्र और उभयचर व अमलाकृति योग में अर्घ्य देंगे।

पं. प्रेमसागर पांडेय बताते हैं कि व्रती सोमवार को डूबते सूर्य को सूर्यास्त से आधा-एक घंटे पहले से अर्घ्य दे और उगते सूर्य की लालिमा होने के बाद अर्घ्य दिया जा सकता है।

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