चुनाव में हार के बाद ट्रंप के लिए ईरान पर कोई कदम उठाना चुनौती, कूटनीतिक रास्ते बंद…

अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की करारी हार के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के सामने ईरान के साथ आठ महीने से जारी युद्ध को लेकर अगला कदम तय करने की चुनौती खड़ी हो गई है।

डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत के पीछे ईरान युद्ध और बढ़ती महंगाई से मतदाताओं की नाराजगी को अहम वजह माना जा रहा है।

ट्रंप ने बुधवार को स्वीकार किया कि युद्ध के कारण पेट्रोल की कीमतें बढ़ने से रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान हुआ। हालांकि, उन्होंने सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर वह दोबारा भी यही फैसला लेंगे।

विशेषज्ञों के मुताबिक, ट्रंप के पास मौजूदा सैन्य कार्रवाई और ईरान के तेल निर्यात पर नौसैनिक नाकेबंदी जारी रखने, उसके परमाणु कार्यक्रम से जुड़े पिकैक्स माउंटेन ठिकाने पर हमला करने या ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने जैसे विकल्प हैं।

हालांकि, बड़े हमलों से वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है। एपी के मतदाता सर्वेक्षण के अनुसार, करीब 60 प्रतिशत मतदाताओं ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को गलत फैसला बताया है। इतनी ही संख्या में मतदाताओं ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर गंभीर चिंता जताई।

ईरान के आईआरजीसी कमांडर गानी की अमेरिका को चेतावनी

इस बीच, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की कुद्स फोर्स के प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल इस्माइल गानी ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वाशिंगटन ने युद्ध में ‘जुआ खेलने जैसी हरकतें’ जारी रखीं तो उसे गंभीर नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए अमेरिका को दोनों रणनीतिक समुद्री मार्गों पर संभावित चुनौतियों के प्रति आगाह किया है।

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