प्रियंका प्रसाद (ज्योतिष सलाहकार): केवल व्हाट्सएप मेसेज 94064 20131
चैत्र नवरात्र का पावन पर्व हर साल भक्त भक्ति भाव के साथ मनाते हैं।
यह दिन आदि-शक्ति के चतुर्थ स्वरूप मां कुष्मांडा को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कुष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए इन्हें सृष्टि की आदि-स्वरूपा माना जाता है।
नवरात्र के नौ दिनों में दान का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन चौथे दिन का दान सीधे तौर पर आपके यश और धन से जुड़ा होता है। ऐसे में अगर आप लंबे समय से आर्थिक तंगी से परेशान हैं, तो इस दिन कुछ विशेष चीजों का दान जरूर करें, जो इस प्रकार हैं –
मां कुष्मांडा और दान का संबंध
मां कुष्मांडा को पेठा बहुत प्रिय है, जिसे संस्कृत में कुष्मांड कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जरूरतमंदों को अपनी क्षमता के अनुसार दान देने से घर की दरिद्रता दूर होती है और मां की असीम कृपा मिलती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां कुष्मांडा का संबंध सूर्य देव से भी है, इसलिए यह दान तेज और यश में वृद्धि करता है।
मां कुष्मांडा और दान का संबंध
मां कुष्मांडा को पेठा बहुत प्रिय है, जिसे संस्कृत में कुष्मांड कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन जरूरतमंदों को अपनी क्षमता के अनुसार दान देने से घर की दरिद्रता दूर होती है और मां की असीम कृपा मिलती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, मां कुष्मांडा का संबंध सूर्य देव से भी है, इसलिए यह दान तेज और यश में वृद्धि करता है।
चौथे दिन करें इन चीजों का महादान
- मां कुष्मांडा को नारंगी रंग बेहद प्रिय है। ऐसे में किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को नारंगी रंग के वस्त्र, संतरा या पपीता दान करें। इससे करियर में तरक्की के रास्ते खुलते हैं।
- इस दिन पेठे का फल या पेठे की मिठाई का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही घर के क्लेश खत्म होते हैं और सुख-शांति का वास होता है।
- मां कुष्मांडा का संबंध सूर्य से है, इसलिए लाल मसूर की दाल या गुड़ का दान करने से समाज में यश बढ़ता है और शत्रुओं का नाश होता है।
दान करते समय रखें इन बातों का ध्यान
- दान हमेशा प्रसन्न मन और निस्वार्थ भाव से करना चाहिए। दिखावे के लिए किया गया दान फलदायी नहीं होता।
- नवरात्र के चौथे दिन दान करने का सबसे अच्छा समय अभिजीत मुहूर्त माना जाता है।
- दान देते समय अपना मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें।
पूजन मंत्र
- ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
- या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
- वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्। सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्मांडा यशस्वनीम्॥
- सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥