पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण मानने और सरकारी योजनाओं में इसके इस्तेमाल को लेकर बढ़ती भ्रांति के बीच विदेश मंत्रालय ने साफ किया है कि भारतीय पासपोर्ट सिर्फ एक ट्रैवल डॉक्यूमेंट है। यह नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
सरकार ने पासपोर्ट और मोबिलिटी इकोसिस्टम पर विस्तृत ब्रीफिंग के दौरान यह स्पष्टीकरण दिया। अधिकारियों ने जोर दिया कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकों को जारी किया जाता है, लेकिन इसका मुख्य उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को आसान बनाना और विदेश में पहचान स्थापित करना है।
अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकों को जारी किए जाते हैं, लेकिन इस दस्तावेज का प्राथमिक उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सक्षम बनाना और विदेश में पहचान स्थापित करना है।
इससे पहले भी आधार कार्ड और मतदाता पहचान पत्र सहित अन्य दस्तावेजों को नागरिकता के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल करने पर सवाल उठाए जा चुके हैं।
पिछले दशक में पासपोर्ट नेटवर्क छह गुना बढ़ा
14वां पासपोर्ट सेवा दिवस मनाए जाने के अवसर पर विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि सरकार पासपोर्ट सेवाओं को सुगम बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। पिछले एक दशक में पासपोर्ट नेटवर्क छह गुना बढ़ चुका है।
देशभर में अब 500 से अधिक पासपोर्ट केंद्र कार्यरत हैं। अकेले 2025 में 1.5 करोड़ पासपोर्ट तथा संबंधित सेवाएं प्रदान की गई हैं। इनमें से केवल पासपोर्टों की संख्या 1.39 करोड़ रही। उल्लेखनीय है कि पासपोर्ट मुख्य रूप से यात्रा का दस्तावेज है, न कि नागरिकता का प्रमाण।
अधिकारी ने बताया कि पुलिस सत्यापन को छोड़कर पासपोर्ट जारी करने में औसतन छह कार्य दिवस लगते हैं। पासपोर्ट सेवा केंद्रों और पोस्ट आफिस पासपोर्ट सेवा केंद्रों में आवेदकों द्वारा बिताया जाने वाला समय 45 मिनट से भी कम है।
आज देशभर में 545 पासपोर्ट केंद्र मौजूद हैं, जबकि 10 वर्ष पहले इनकी संख्या केवल 77 थी। इस प्रकार पासपोर्ट केंद्रों की संख्या में लगभग छह गुना वृद्धि दर्ज की गई है। हमने पिछले साल 10 पोस्ट आफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र खोले थे और इस साल 10 और केंद्र खोले जाएंगे।