केंद्र सरकार ई-वे बिल ढांचे में सुधार के लिए राज्यों के साथ बातचीत कर रही है। इस पर जीएसटी परिषद की अगली बैठक में चर्चा होगी।
पिछले सप्ताह जारी आर्थिक समीक्षा में कहा गया था कि जीएसटी सुधारों में अगली कड़ी ई-वे बिल प्रणाली को केवल प्रवर्तन और नियंत्रण के साधन के बजाय सुगम माल ढुलाई के साधन के रूप में दोबारा परिभाषित करने पर केंद्रित हो सकती है।
ई-वे बिल सुधारों से माल ढुलाई व्यवस्था का काफी हद तक विनियमन कम होगा। इससे व्यापार के लिए लागत और देरी कम होगी। साथ ही कर प्रशासन के लिए प्रभावी और बिना हस्तक्षेप वाली निगरानी बनी रहेगी।
सूत्र ने कहा, ‘हम ई-वे बिल सुधार पर राज्यों के साथ काम कर रहे हैं और इसे जीएसटी परिषद के समक्ष रखेंगे।’ केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में और राज्य मंत्रियों से मिलकर बनी जीएसटी परिषद की पिछली बैठक तीन सितंबर, 2025 को हुई थी।
इसमें 375 वस्तुओं पर कर दरों में कटौती और स्लैब को तर्कसंगत बनाने का फैसला लिया गया था।
ई-वे बिल प्रणाली एक प्रभावी डिजिटल विकल्प के तौर पर उभरी है। इससे माल की आवाजाही की ऑनलाइन निगरानी संभव हुई।
इससे राज्य सीमाओं पर भौतिक बाधाओं को पुन: लागू किए बिना कर प्रशासन के उद्देश्यों को समर्थन मिला।
जीएसटी के तहत, 50,000 रुपये से अधिक मूल्य का माल ले जाने वाले व्यक्ति को ई-वे बिल लेना अनिवार्य है। माल परिवहन से पहले जीएसटी पंजीकृत व्यक्ति या माल ढुलाई करने वालों द्वारा जीएसटी पोर्टल से यह दस्तावेज लेना आवश्यक है।