वर्ष 2023 में पूर्व कनाडाई सरकार के आरोपों के बाद आई कूटनीतिक दूरियों को पीछे छोड़ते हुए भारत और कनाडा ने संबंधों को पूरी तरह पटरी पर लाने और उन्हें नई गति देने का निर्णायक संकेत दिया है।
नई दिल्ली में सोमवार को कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और पीएम नरेन्द्र मोदी के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता में व्यापार, ऊर्जा, रक्षा और समुद्री सुरक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में व्यापक सहमतियां बनीं।
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है और इस वर्ष के अंत तक एक व्यापक आर्थिक समझौते पर हस्ताक्षर करने की दिशा में काम तेज करने का निर्णय लिया है।
साथ ही रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर नये सिरे से संवाद करने का फैसला किया और परमाणु ऊर्जा के लिए यूरेनियम आपूर्ति, दुर्लभ खनिजों, ऊर्जा आपूर्ति, सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर आठ समझौतों पर हस्ताक्षर किये गये हैं।
शुक्रवार को भारत दौरे पर आए कार्नी
कार्नी पिछले शुक्रवार को ही भारत दौरे पर आये हैं। मार्च, 2025 में सत्ता संभालने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है, हालांकि इस दौरान वह दो बार पीएम मोदी से मुलाकात कर चुके थे।
वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने स्वीकार किया कि हाल के वर्षों की तल्खियों ने संबंधों की गति को प्रभावित किया, लेकिन अब एक नया रोडमैप तैयार किया जा रहा है जो परस्पर सम्मान, आर्थिक सहयोग और साझा वैश्विक दृष्टि पर आधारित होगा।
बैठक के बाद संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में पीएम मोदी ने कहा कि, ‘भारत और कैनेडा लोकतान्ति्रक मूल्यों में अटूट विश्वास रखते हैं। हम विविधता का जश्न मनाते हैं।
मानवता की भलाई हमारा साझा दृष्टिकोण है। आज हमने इस विजन को साजेदारी के अगले चरण में बदलने पर चर्चा की है। हमारा लक्ष्य है कि 2030 तक हमारा व्यापार 50 अरब डॉलर तक पहुँचे। आर्थिक सहयोग के पूरी क्षमता का इस्तेमाल हमारी प्राथमिकता है। इससे दोनों देशों में निवेश और रोजगार के नए अवसर बनेंगे।’
भारत व कनाडा ने एक साझा बयान जारी किया
दोनों नेताओं ने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वह दिसंबर, 2026 तक द्विपक्षीय कारोबारी समझौते को अंतिम रूप देने की व्यवस्था करें।
बैठक के बाद भारत व कनाडा ने एक साझा बयान जारी किया है जिसका नाम ‘ज्वाइंट लीडर्स स्टेटमेंट’ दिया गया है जो संबंधों को दिशा देने में मोदी और कार्नी के निर्देश को सामने रखता है। ऊर्जा व कारोबार दो ऐसे क्षेत्र हैं जो आने वाले दिनों में भारत व कनाडा के संबंधों को तय करेंगे।
भारत की परमाणु ऊर्जा विभाग और कनाडा की कंपनी कैमेको के बीच यूरेनियम आपूर्ति के लिए वाणिज्यिक अनुबंध किया गया है, जो परमाणु ऊर्जा के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम।
भारत ने वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा बनाने का लक्ष्य रखा है, इसमें कनाडा साझेदार बनने को तैयार है। साथ ही अगले कुछ वर्षों में कनाडा एलएनजी और कच्चे तेल का बहुत ही बड़ा उत्पादक बनने जा रहा है।
रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर संवाद फिर से शुरू
भारत ने कनाडा से उक्त दोनों उत्पादों की खरीद की समझौता करने को तैयार है। भारत व कनाडा में पहले रक्षा क्षेत्र में सहयोग की रूप-रेखा बनी थी लेकिन संबंधों में आये तनाव की वजह से उसकी गति प्रभावित हुई। अब मोदी और कार्नी की बैठक में फैसला किया गया है कि रक्षा क्षेत्र में सहयोग पर संवाद फिर से शुरू की जाएगी।
मोदी ने कहा कि, ‘रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ता सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास और संबंधों का प्रतीक है। हम रक्षा उद्योग, समुद्री सुरक्षा, सैन्य एक्सचेंज बढ़ाने पर काम करेंगे। इसी उद्देश्य से आज हमने भारत-कनाडा डिफेंस डायलाग की स्थापना करने का निर्णय लिया है।’
कनाडा को भारत में रक्षा राजनयिक नियुक्त करने की अनुमति दे दी गई है। दोनों नेता यह मानते हैं कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में भी भारत व कनाडा के बीच सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। संयुक्त बयान मे कहा गया है कि ‘भारत की हिंद महासागर क्षेत्र की सोच और कनाडा की इंडो-पैसिफिक रणनीति में काफी समानता बढ़ रही है। दोनों देश स्थिरता, सतत विकास, बेहतर कनेक्शन और सबके लिए विकास में एक जैसे हित रखते हैं। भारत ने कनाडा की इस बात का स्वागत किया कि वह इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन (आईओआरए) में डायलॉग पार्टनर बनना चाहता है। भारत को लगता है कि कनाडा इससे अच्छा योगदान दे सकता है।’