इंटरनेट मीडिया पर न्यायाधीशों और अदालत के विरुद्ध बढ़ती आपत्तिजनक टिप्पणियों पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई है।
अदालत ने राज्य पुलिस से पूछा है कि इस तरह के मामलों से निपटने के लिए कोई स्टैंडर्ड आपरेटिंग प्रोसीजर यानी एसओपी मौजूद है या नहीं?
मालूम हो कि नियुक्ति घोटाला और आरजी कर जैसे चर्चित मामलों में फैसलों के बाद इंटरनेट मीडिया पर न्यायाधीशों के आदेशों की आलोचना के साथ-साथ अशालीन टिप्पणियां और कटाक्ष किए जा रहे हैं।
इसी मुद्दे पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता ने राज्य के पुलिस महानिदेशक से चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 22 जून को होगी।
यह मामला महाराज स्वामी प्रदीप्तानंद उर्फ कार्तिक महाराज की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने कुछ यूट्यूब वीडियो का उल्लेख किया, जिनमें कोर्ट की पीठ और न्यायाधीशों के विरुद्ध कथित रूप से जानबूझकर अपमानजनक टिप्पणियां की गई थीं।
अदालत ने कहा कि कुछ वीडियो में ऐसे संकेत दिए गए, मानों बंद कमरे में अदालत की ओर से कोई गलत कदम उठाया जा रहा हो, जबकि उस दिन अदालत की पीठ बैठी ही नहीं थी।
न्यायमूर्ति सेनगुप्ता ने यह भी कहा कि कुछ वीडियो में न्यायाधीशों के विरुद्ध मानहानिकारक और अदालत की अवमानना करने वाली बातें कही गई हैं, जो बेहद चिंताजनक हैं।