छत्तीसगढ़ में नए धर्मांतरण कानून को कैबिनेट की मंजूरी, उल्लंघन पर 10 साल की जेल और भारी जुर्माना निर्धारित…

 छत्तीसगढ़ सरकार ने जबरन मतांतरण रोकने के लिए नए कानून को मंजूरी दी है। यह बिल (छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय विधेयक, 2026) इसी बजट सत्र में विधानसभा में पेश किया जाएगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया। यदि यह कानून लागू होता है, तो स्वैच्छिक मतांतरण करने वाले व्यक्तियों को कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित सूचना देनी होगी।

प्रलोभन, छल-कपट या धोखाधड़ी से कराए गए मतांतरण पर 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। सामूहिक मतांतरण के मामले में सजा और भी कठोर होगी।

मतांतरण के 60 दिनों के भीतर एक घोषणा पत्र भरना अनिवार्य होगा और प्रशासन इसकी जांच करेगा कि यह स्वेच्छा से हुआ है या नहीं। न्यायालय पीडि़त को पांच लाख रुपये तक का मुआवजा दिलाने का आदेश दे सकता है।

मार्च 2027 के बाद छत्तीसगढ़ से शुरू होगी अ‌र्द्धसैनिक बलों की वापसी

2027 के बाद छत्तीसगढ़ के बस्तर से अ‌र्द्धसैनिक बलों की वापसी की प्रक्रिया आरंभ होगी। यह जानकारी विधानसभा में गृह विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री विजय शर्मा ने दी।

उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार ने 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र माओवादी ¨हसा को समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। इसके सफल कार्यान्वयन के बाद, बस्तर से केंद्रीय अ‌र्द्धसैनिक बलों की वापसी की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सदन में केंद्रीय बलों की तैनाती पर होने वाले भारी खर्च का मुद्दा भी उठाया गया।

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने केंद्र सरकार द्वारा मांगे गए 21,530 करोड़ रुपये के भुगतान पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने जून में नोटिस भेजकर इस राशि की मांग की है, जो राज्य के बजट में नहीं है। डा. महंत ने पूर्ववर्ती सरकारों का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले कभी केंद्र ने इस तरह से सुरक्षा व्यय की मांग नहीं की थी।

उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा 17 मार्च 2025 को लिखे गए पत्र का भी उल्लेख किया, जिसमें इस कर्ज को माफ करने का अनुरोध किया गया था। गृहमंत्री विजय शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह बकाया राशि पूर्व सरकारों के समय से है और इसका ‘फाइनल सेटलमेंट’ किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस खर्च का राज्य के वित्तीय ढांचे पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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