बॉम्बे हाई कोर्ट की कोल्हापुर बेंच ने दो दोषियों की उम्रकैद की सजा पर रोक लगा दी है। 29 साल की अश्विनी चव्हाण और 41 साल के सचिन कुंभार को 10 साल के बच्चे की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था। ये बच्चा कोई और नहीं बल्कि अश्विनी चव्हाण का बेटा था।
फिलहाल कोर्ट ने इन दोनों की उम्रकैद की सजा को तब तक के लिए सस्पेंड कर दिया है जब तक कि चव्हाण के 10 साल के बेटे की हत्या के मामले में उनकी सजा को चुनौती देने वाली आपराधिक अपील का अंतिम फैसला नहीं हो जाता। जस्टिस मिलिंद एन जाधव और जस्टिस नंदेश एस देशपांडे की बेंच ने 3 जुलाई को सजा सस्पेंड करने की उनकी अंतरिम अर्जी को मंजूरी देते हुए यह आदेश दिया।
2019 में हुई थी दोनों की गिरफ्तारी
सतारा जिले में वाई के पास एक कंपनी में साथ काम करने वाले चव्हाण और कुंभार को 8 मई 2019 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने 28 अप्रैल की रात चव्हाण के बेटे गौरव को धोम डैम की नहर में धकेलकर उसकी हत्या कर दी थी। अगले दिन उसका बेजान शरीर पानी में तैरता हुआ मिला। यह जगह नवेची वाडी से कुछ किलोमीटर दूर थी, जहां कथित तौर पर अपराध हुआ था।
लड़के के पिता ने गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। सतारा पुलिस ने कहा कि चव्हाण और कुंभार के बीच नाजायज संबंध थे और उसके बेटे को इसके बारे में पता चल गया था। उसने उन्हें आपत्तिजनक हालत में भी देख लिया था, जिसके बाद वह दोनों को नापसंद करने लगा और कहा कि वह इस रिश्ते के बारे में किसी को बता देगा।
पुलिस का आरोप है कि दोनों ने गांव के मेले वाली रात हत्या की योजना बनाई ताकि किसी को पता न चले। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मां गौरव को अपनी स्कूटी पर नहर के किनारे ले गई जहां कुंभार इंतजार कर रहा था और उसने बच्चे को नहर में धकेल दिया। डॉक्टरों ने बताया कि गौरव की मौत डूबने से दम घुटने के कारण हुई थी और शरीर पर चोट के निशान भी मिले थे, जो शायद घसीटने या धकेलने से आए थे।
2015 में सुनाई गई सजा
इस मामले की सुनवाई वाई के एडिशनल सेशंस जज जस्टिस आर एन मेहरे के सामने हुई। उन्होंने 30 जनवरी 2025 को दोनों को हत्या के लिए उम्रकैद और अपहरण के लिए पांच साल की सख्त सजा सुनाई। दोनों सजाएं साथ-साथ चलनी थीं। उन्होंने सजा और दोषसिद्धि को अलग-अलग चुनौती दी।
दो जजों की पीठ ने क्या कहा?
जजों ने कहा, “दोषी ठहराने के फैसले और आदेश को पढ़ने पर हमें पता चलता है कि अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूत परिस्थितिजन्य हैं, न कि सीधे। सबसे अहम बात यह है कि जब गवाह PW-5 (यानी आरोपी नंबर 1 अश्विनी चव्हाण के पति) के बयान को देखा जाता है तो अपराध का मकसद पहली नजर में ही कमजोर पड़ जाता है। उन्होंने उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि उन्हें दोनों आरोपियों के बीच एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर (विवाह-बाहर संबंध) के बारे में पता था।”
जजों ने आगे कहा, “इस नजरिए से अभियोजन पक्ष का तर्क कुछ कमजोर हो जाता है। हालाकि, इस पर फैसला हम तब करेंगे जब हम 2025 में दायर आपराधिक अपीलों पर सुनवाई करेंगे और इस बात की बहुत कम संभावना है कि इन अपीलों पर निकट भविष्य में तुरंत कोई फैसला लिया जाएगा।”
दो जजों की बेंच ने दोनों आरोपियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया कि वे अगस्त 2026 से शुरू करते हुए हर छह महीने में एक बार महीने के पहले सोमवार को ट्रायल कोर्ट में हाजिर हों।