रायपुर : शासकीय फार्म में नील-हरित काई उत्पादन की शुरुआत…

किसानों को मिलेगा सस्ता जैव उर्वरक

रायगढ़ जिले में स्थित शासकीय कृषि प्रक्षेत्र बेहरामार में नील-हरित शैवाल (ब्लू-ग्रीन एल्गी) के उत्पादन प्रक्रिया की शुरूआत हो चुकी है।

यह पहल किसानों को किफायती दर पर जैविक उर्वरक उपलब्ध कराने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

ywAAAAAAQABAAACAUwAOw==

नील-हरित शैवाल, जिसे वैज्ञानिक रूप से सायनोबैक्टीरिया कहा जाता है, मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में अत्यंत उपयोगी है। यह प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन स्थिरीकरण की प्रक्रिया के माध्यम से भूमि में पोषक तत्वों की पूर्ति करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इसके उपयोग से प्रति हेक्टेयर लगभग 25 से 30 किलोग्राम तक नाइट्रोजन की आपूर्ति संभव है, जिससे रासायनिक उर्वरकों की जरूरत कम पड़ती है।

कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस जैव उर्वरक का उपयोग विशेष रूप से धान की फसलों में लाभकारी है। जलभराव वाले खेतों में नील-हरित शैवाल तेजी से विकसित होता है, जिससे धान उत्पादन में वृद्धि और गुणवत्ता में सुधार होता है।

इसके अतिरिक्त, यह क्षारीय एवं बंजर भूमि की उत्पादकता बढ़ाने में भी सहायक है। बेहरामार कृषि प्रक्षेत्र में शुरू किए गए इस उत्पादन केंद्र के माध्यम से किसानों को उचित मूल्य पर नील-हरित शैवाल उपलब्ध होगा। इससे न केवल उनकी खेती की लागत में कमी आएगी, बल्कि वे जैविक खेती की ओर भी प्रेरित होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि जैव उर्वरकों के उपयोग से मृदा स्वास्थ्य बेहतर होता है। इस अभिनव प्रयास के जरिए राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सतत विकास के लक्ष्यों की ओर एक और ठोस कदम बढ़ा रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *