भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार सोमवार ने नालंदा विश्वविद्यालय के सुषमा स्वराज सभागार में आयोजित इंटरेक्शन विद बीएलओ कार्यक्रम में शरीक हुए।
जिसमें गया, नवादा, जहानाबाद, शेखपुरा और नालंदा जिले के करीब 500 बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) शिरकत कर रहे थे। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बीएलओ से सीधे संवाद कर निर्वाचन प्रक्रिया में शिक्षा जगत की भूमिका और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल पर चर्चा की।
बीएलओ लोकतंत्र की मजबूत आधारशिला
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि देश की चुनाव प्रक्रिया में बूथ लेवल ऑफिसर्स की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। बीएलओ ही लोकतंत्र की मजबूत आधारशिला हैं।
उन्होंने विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान बिहार के बीएलओ के बेहतर कार्य की सराहना करते हुए कहा कि इनके उत्कृष्ट कार्य ने न केवल बिहार, बल्कि पूरे देश और विश्व के सामने नई राह दिखाई है।
तीन स्तर पर होती है चुनाव प्रक्रिया की निगरानी
मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत की चुनाव प्रणाली ‘कॉनकरेंट ऑडिट’ यानी समवर्ती समीक्षा के अधीन है। मतदाता सूची तैयार होने से लेकर चुनाव परिणाम की घोषणा तक हर स्तर पर राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों की निगरानी रहती है।
उन्होंने बताया कि राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट मतदाता सूची का ऑडिट करते हैं। मतदान के दिन उम्मीदवारों के पोलिंग एजेंट बूथ पर पूरी प्रक्रिया की निगरानी करते हैं।
वहीं, मतगणना के दौरान काउंटिंग एजेंट वोटों की गिनती की समीक्षा करते हैं। इस व्यवस्था से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है और किसी भी स्तर पर चूक की संभावना कम होती है।
नालंदा के प्राचीन वैभव से प्रभावित हुए मुख्य चुनाव आयुक्त
राजगीर दौरे के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने ऐतिहासिक नालंदा विश्वविद्यालय का भी भ्रमण किया। नालंदा के प्राचीन वैभव की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के दर्शन के बाद उन्हें यह अनुभव हुआ कि हजारों वर्ष पहले भी भारतीय संस्कृति ज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में कितनी समृद्ध और उन्नत रही होगी।
कार्यक्रम के अंत में मुख्य चुनाव आयुक्त ने उपस्थित अधिकारियों और बीएलओ का धन्यवाद किया। उन्होंने अपने संबोधन का समापन ‘जय भारत’ के उद्घोष के साथ किया।