अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी बनाने का बिल लोकसभा से पारित, कांग्रेस ने भी अपना समर्थन दिया…

अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी के तौर पर मान्यता देने वाला बिल बुधवार को लोकसभा में पास हो गया। भाजपा कांग्रेस और टीडीपी ने इस बिल का समर्थन किया। इस बिल को लोकसभा में ध्वनि मत से पास किया गया।

लोकसभा में आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 पर बहस शुरू करते हुए कांग्रेस सदस्य मणिकम टैगोर ने कहा कि कांग्रेस इस कानून का पूरी तरह समर्थन करती है, लेकिन वह आंध्र प्रदेश को विशेष दर्जा दिए जाने की मांग करती है। 

कांग्रेस सांसद ने क्या कहा?

उन्होंने कहा, “अमरावती का विकास बेंगलुरु, चेन्नई या हैदराबाद की तरह होने दें। विशाखापत्तनम, तिरुपति और कुरनूल का भी विकास होने दें। हम अमरावती को आंध्र प्रदेश की स्थायी राजधानी के रूप में समर्थन देते हैं।”

बहस में भाग लेते हुए टीडीपी सदस्य और ग्रामीण विकास तथा संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने भी सदन से अपील की कि वे इस विधेयक को सर्वसम्मति से पारित करें, क्योंकि इससे आंध्र प्रदेश के लिए एक स्थायी राजधानी सुनिश्चित होगी।

भाजपा सांसद ने क्या कहा?

बिल का समर्थन करते हुए भाजपा सदस्य सीएम रमेश ने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में यह पहली बार है कि संसद में कोई ऐसा बिल लाया गया है, जिसके तहत किसी खास जगह को किसी राज्य की राजधानी घोषित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि अब से आंध्र प्रदेश की राजधानी के साथ कोई भी खिलवाड़ नहीं कर पाएगा, क्योंकि अमरावती ही राज्य की एकमात्र और स्थायी राजधानी होगी।

रमेश ने पिछली राज्य सरकार के आंध्र प्रदेश की तीन राजधानियां बनाने के कदम की कड़ी आलोचना की और इस फैसले को तर्कहीन और बेतुका बताया।

उन्होंने कहा, “यह बिल इस बात को पक्का करेगा कि आंध्र प्रदेश की राजधानी के साथ कोई भी खिलवाड़ न कर पाए। हम आंध्र प्रदेश के लिए एक स्थायी राजधानी चाहते हैं, जिससे राजस्व बढ़ेगा और राज्य तरक्की करेगा।”

वाईएसआर कांग्रेस ने किया बिल का विरोध

हालांकि, आंध्र प्रदेश में टीडीपी की कट्टर प्रतिद्वंद्वी वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने इस कानून का जोरदार विरोध किया और कहा कि इसका कोई मतलब नहीं है, जब तक कि किसानों के हितों की रक्षा न की जाए और किसानों को मुआवजा देने के लिए कोई पक्की समय-सीमा न तय की जाए।

वाईएसआरसीपी के सदस्य पी. वी. मिथुन रेड्डी ने कहा कि राज्य सरकार ने अमरावती को राजधानी के तौर पर विकसित करने के लिए 34,000 एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी और यह वादा किया था कि प्रभावित लोगों को मुफ्त में विकसित प्लॉट, आवास योजना और उनके बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा दी जाएगी लेकिन अब कुछ नहीं किया गया।

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