रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाला विधेयक अमेरिकी सीनेट में पारित, भारत पर कितना पड़ेगा असर?…

अमेरिका लगातार ईरान और रूस को आर्थिक मोर्चे पर लगातार घेरने में लगा हुआ है। इस बीच, अमेरिकी सीनेट ने शुक्रवार को लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026 नामक व्यापक द्विदलीय प्रतिबंध विधेयक पारित कर दिया।

इस विधेयक से संबंधित कानून लागू होने का सर्वाधिक असर भारत, चीन, जापान और यूरोप के कुछ देशों पर पड़ सकता है।

इस विधेयक का उद्देश्य मॉस्को और तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और उन देशों को निशाना बनाना है, जो रूसी ऊर्जा खरीदकर रूस के युद्ध प्रयासों को वित्तपोषित कर रहे हैं।

दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के नाम पर रखे गए इस विधेयक में अमेरिकी राष्ट्रपति को उन देशों पर दंडात्मक टैरिफ और प्रतिबंध लगाने का अधिकार दिया गया है, जो रूसी तेल और गैस का बड़ा आयात जारी रखते हैं।

पहले के प्रस्तावों में 500 प्रतिशत तक टैरिफ की बात कही गई थी, लेकिन अंतिम संस्करण में अधिकतम टैरिफ 100 प्रतिशत कर दिया गया है। राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हित में इन दंडों को माफ करने, स्थगित करने या संशोधित करने का व्यापक विवेकाधिकार भी दिया गया है।

भारत के लिए क्या मायने

भारत के लिए इस विधेयक के गंभीर निहितार्थ हो सकते हैं। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से भारत रियायती रूसी कच्चे तेल का दुनिया के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल हो गया है।

रूसी तेल अब भारत के कच्चे तेल आयात का बड़ा हिस्सा बन चुका है, इसलिए नई दिल्ली इस प्रस्तावित कानून के तहत सबसे अधिक निगरानी वाले देशों में है।

हालांकि, विधेयक कानून बनने पर भारत पर स्वतः टैरिफ नहीं लगेगा। अमेरिकी प्रशासन को इन उपायों को लागू करने या न करने का पूरा लचीलापन प्राप्त है।

विश्लेषकों का कहना है कि कोई भी निर्णय भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी (इंडो-पैसिफिक सहयोग, रक्षा, प्रौद्योगिकी और चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला) को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *