पेपर लीक विधेयक पर बड़ा कदम, जांच से फैसले तक सख्त प्रावधान; टास्क फोर्स के सामने कई चुनौतियां…

केंद्र सरकार ने देश में परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने और पेपर लीक जैसी गंभीर समस्याओं पर रोक लगाने के लिए एक नया और बेहद सख्त संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश किया है।

भारी हंगामे के बीच केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा पेश किए गए इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य नकल माफिया और पेपर लीक करने वाले गिरोहों पर लगाम कसना है।

इस विधेयक के तहत पेपर लीक से जुड़े मामलों में अब दस साल की अधिकतम सजा और दस करोड़ की जुर्माना होगा। इस दौरान जांच और सुनवाई दोनों साथ चलेगी। जिसमें जांच दो महीने में और सुनवाई तीन महीने में पूरी कर सजा का प्रावधान किया गया है।

नए विधेयक में पांच बड़े बदलाव क्या-क्या?

बता दें कि 2024 के नियमों की कमियों को दूर करते हुए 2026 के इस प्रस्तावित विधेयक में सजा और जुर्माने के प्रावधानों को बेहद कड़ा किया गया है।

पहलूपुराना कानून (2024)नया प्रस्तावित विधेयक (2026)
सामान्य गड़बड़ी और पेपर लीक3 से 5 साल की सजा और अधिकतम 10 लाख रुपये तक का जुर्माना।5 से 10 साल की सजा और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना।
गिरोह बनाकर नकल/पेपर लीक5 से 10 साल की जेल और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना।7 से 10 साल की सजा और 5 करोड़ रुपये तक का जुर्माना।
जांच की समय-सीमाकोई निश्चित समय-सीमा तय नहीं थी।जांच अब सिर्फ 2 महीने के भीतर पूरी करनी होगी।
सुनवाई और फैसलासामान्य अदालतों में लंबी चलने वाली प्रक्रिया।फास्ट ट्रैक कोर्ट में मात्र 3 महीने के भीतर सुनवाई पूरी होगी।
निजी एजेंसियों पर कार्रवाईदोषी मिलने पर 4 साल के लिए ब्लैकलिस्ट।कड़ा कदम उठाते हुए इसे बढ़ाकर 8 साल कर दिया गया है।

जांच से लेकर फैसले तक का नया तंत्र

इतना ही नहीं इस नए कानून के तहत मामलों की निष्पक्ष और तेज जांच के लिए एक समर्पित स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के गठन का प्रावधान किया गया है। सबसे बड़ा बदलाव यह है कि जांच और कोर्ट की सुनवाई साथ-साथ चलेंगी, जिससे दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सकेगी।

कानून कितना असरदार होगा, चुनौतियां भी समझिए

गौरतलब है कि इस पूरे मामले में कड़ा कानून बनना एक बड़ा कदम है, लेकिन इसे जमीन पर उतारना और परीक्षा माफिया की जड़ों को उखाड़ फेंकना अभी भी एक बड़ी चुनौती है। इस बात को ऐसे समझिए कि देश में पिछले 77 वर्षों से परीक्षा माफिया को फलने-फूलने का पूरा मौका मिला, क्योंकि पहले इसे रोकने के लिए कोई प्रभावी और सख्त केंद्रीय कानून मौजूद नहीं था।

ऐसे में भले ही कानून सख्त हो रहा है, लेकिन नकल माफिया आए दिन नए-नए तरीके और हथकंडे अपना रहे हैं, जिससे पूरी तरह से पार पाना आसान नहीं होगा। इस समस्या से पूरी तरह निपटने के लिए केंद्र और सभी राज्य सरकारों को मिलकर अपने स्तर पर सुरक्षित प्रिंटिंग प्रेस स्थापित करने होंगे, योग्य पेशेवरों की भर्ती करनी होगी और अपराधियों के मन में कानून का ऐसा डर पैदा करना होगा ताकि कोई भी इस तरह के अपराध के बारे में सोच भी न सके।

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