एसोसिएशन फार डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले साल बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने वाले राजनीतिक दलों ने चुनाव के दौरान 281.32 करोड़ रुपये का फंड इकट्ठा किया और 193.47 करोड़ रुपये खर्च किए, जिसमें प्रचार पर सबसे ज़्यादा खर्च हुआ।
इस रिपोर्ट में भाजपा, कांग्रेस, आप, बसपा और माकपा समेत पांच राष्ट्रीय दलों और पांच क्षेत्रीय दलों — राजद, जदयू, लोजपा (राम विलास), एआइएमआइएम और भाकपा द्वारा दाखिल खर्च के ब्योरों का विश्लेषण किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 10 राजनीतिक दलों ने मिलकर 281.323 करोड़ रुपये जुटाए, जबकि उनका कुल खर्च 193.466 करोड़ रुपये रहा। प्रचार पर खर्च कुल खर्च का 36.68 प्रतिशत यानी 100.429 करोड़ रुपये रहा।
राजनीतिक दलों ने यात्रा पर 79.539 करोड़ रुपये और उम्मीदवारों को एकमुश्त भुगतान के तौर पर 62.072 करोड़ रुपये खर्च किए।
इंटरनेट मीडिया और दूसरे डिजिटल माध्यमों से वर्चुअल कैंपेनिंग पर 13.074 करोड़ रुपये खर्च हुए, जबकि राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग के निर्देशानुसार उम्मीदवारों के आपराधिक रिकॉर्ड को प्रकाशित करने पर 3.886 करोड़ रुपये खर्च किए। अन्य खर्च 14.804 करोड़ रुपये रहे।
बिहार विधानसभा चुनाव में 161 राजनीतिक दलों ने हिस्सा लिया, जिनमें छह राष्ट्रीय दल, 10 क्षेत्रीय दल और 145 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल शामिल थे। यह रिपोर्ट 2025 बिहार विधानसभा चुनावों के बाद राजनीतिक दलों द्वारा चुनाव आयोग को सौंपे गए खर्च के ब्यौरे पर आधारित है।