महाराष्ट्र के नासिक में सेशन कोर्ट ने शुक्रवार को पांच आरोपितों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। सभी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
उन पर टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) से जुड़े एक संवेदनशील मामले में अत्याचार, धार्मिक दबाव, उत्पीड़न और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप हैं।
कोर्ट की ओर से राहत से इनकार के बाद, आगे की जांच पूरी होने तक ये सभी आरोपित सेंट्रल जेल में ही रहेंगे। आरोपितों अश्विनी चेनानी, रजा मेनन, आसिफ अंसारी, शाहरुख कुरैशी और तौसीफ अत्तार ने सेशन कोर्ट में अलग-अलग जमानत याचिकाएं दायर की थीं।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपों की गंभीरता और संवेदनशील प्रकृति का हवाला देते हुए याचिकाएं खारिज कर दीं।
पुलिस के अनुसार, इस मामले में अत्याचार, जान-बूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, कथित तौर पर मतांतरण की कोशिश, महिला कर्मचारियों के उत्पीड़न, छेड़छाड़, अनुचित शारीरिक व्यवहार, ब्लैकमेल और कार्यस्थल पर डराने-धमकाने के आरोप शामिल हैं।
सरकारी वकील विजय गायकवाड़ ने कहा कि गिरफ्तारियां सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार की गई हैं।
गायकवाड़ ने कहा, ”अगर निदा खान 40 दिनों तक लापता रह सकती हैं, तो इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि दूसरे आरोपित भी फरार नहीं हो जाएंगे। इसलिए, जांच के मकसद से उनकी हिरासत जरूरी है।”