राजस्थान में पिछले कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल करने वाले 25 कर्मचारियों को निलंबित करने के साथ ही गिरफ्तार किया गया है।
साथ ही फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी हासिल करने वाले 20 अन्य सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज किया गया है।
ऐसे में अब तक 45 फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र से सरकारी कार्मिक बनने वालों की जांच पूरी हुई है। करीब 500 सरकारी कार्मिक जांच के दायरे में हैं।
इस मामले में ग्रामीण विकास विभाग में विकास अधिकारी के पद पर कार्यरत शेरसिंह को शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया।
जयपुर सवाई मानसिंह अस्पताल में स्थित पुलिस थाने में थाना अधिकारी सूरजमल ने बताया कि सूचना के आधार पर विकास अधिकारी शेरसिंह की जांच की गई तो उसका प्रमाण पत्र फर्जी निकला।
फर्जी दिव्यांगता प्रमाण पत्र देने और दलाली करने वालों के खिलाफ चलाए गए इस अभियान में सरकारी अस्पतालों में कार्यरत आधा दर्जन चिकित्सकों के खिलाफ पुलिस में अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं।
चिकित्सकों ने पैसे लेकर किसी को श्रवण बाधित प्रमाण पत्र दिया तो किसी को दृष्टिबाधित प्रमाण पत्र दिए थे। एसओजी पिछले तीन माह से इस मामले की जांच कर रही है।