भागलपुर में जिलाधिकारी डा. नवल किशोर चौधरी ने मृतक अनुग्रह अनुदान की जटिल प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए नया दिशा-निर्देश जारी किया है। सोमवार से लागू इस आदेश के तहत अब आपदा पीड़ित परिवारों को समय पर राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
आवेदन प्रक्रिया में बदलाव
पहले जहां कई स्तरों की जटिल प्रक्रिया के कारण भुगतान में लंबा समय लग जाता था, वहीं अब तय समयसीमा में कार्यवाही सुनिश्चित की गई है। पूर्व व्यवस्था में आवेदन अंचल अधिकारी से लेकर भूमि सुधार उपसमाहर्त्ता और अनुमंडल पदाधिकारी के बीच कई बार आगे-पीछे होता था, जिससे अनुदान मिलने में देरी होती थी।
नई व्यवस्था में आवेदन प्रक्रिया को छोटा करते हुए जिम्मेदारी स्पष्ट कर दी गई है। अब आवेदन अंचल अधिकारी या अपर समाहर्त्ता (आपदा प्रबंधन) के पास सीधे दिया जा सकेगा। आवेदन प्राप्त होते ही उसी दिन उसकी प्रति जिला आपदा प्रबंधन शाखा को भेजी जाएगी।
समयसीमा और अभिलेख तैयारी
निर्देश के अनुसार अंचल अधिकारी को आवेदन प्राप्ति के छह कार्यदिवस के भीतर जांच कर अभिलेख तैयार कर सीधे अनुमंडल पदाधिकारी को भेजना होगा। अनुमंडल पदाधिकारी को भी छह कार्यदिवस के भीतर अभिलेख स्वीकृत या अस्वीकृत करना होगा। किसी प्रकार की त्रुटि होने पर फाइल लौटाने के बजाय संबंधित पक्ष को बुलाकर अधिकतम तीन दिनों में सुधार कराया जाएगा।
स्वीकृति के बाद अभिलेख सीधे जिला आपदा प्रबंधन शाखा को भेजा जाएगा। यहां अधिकतम तीन कार्यदिवस में जिलाधिकारी से भुगतान की स्वीकृति ली जाएगी। इसके बाद 24 घंटे के भीतर रिवॉल्विंग फंड से आश्रित को चेक या आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। यदि फंड में राशि उपलब्ध नहीं होती है, तो तीन कार्यदिवस के भीतर विभाग से आवंटन की मांग की जाएगी।
आवश्यक दस्तावेज और लंबित मामलों का निपटान
नए आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आवेदन के साथ एफआईआर, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड और बैंक पासबुक सहित सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न करना अनिवार्य होगा।
जिलाधिकारी ने लंबित मामलों को भी जल्द निपटाने का निर्देश दिया है। भूमि सुधार उपसमाहर्त्ता को अपने पास लंबित सभी मामलों को तीन दिनों के भीतर संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी को भेजने का आदेश दिया गया है।
राहत समय पर मिलने की उम्मीद
इस नई व्यवस्था से अब आपदा पीड़ित परिवारों को समय पर आर्थिक सहायता मिलने की संभावना बढ़ गई है। जिलाधिकारी का कहना है कि इस प्रक्रिया से पारदर्शिता बढ़ेगी और गरीब और पीड़ित परिवारों को राहत देने में प्रशासनिक देरी नहीं होगी।