राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: पहली पत्नी से तलाक के बिना दूसरी शादी शून्य…

राजस्थान हाई कोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने बिना कानूनी तलाक लिए नाता प्रथा के जरिए दूसरी शादी करने और फिर पहली पत्नी से तलाक मांगने वाले एक पति की अपील को खारिज कर दिया।

जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने एक फैसले में राजसमंद की फैमिली कोर्ट के निर्णय को बरकरार रखा है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत बिना तलाक दूसरी शादी शून्य है और इसे कोई कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती।

दरअसल राजसमंद जिले की निवासी युवक की शादी 5 मई 1992 को भीलवाड़ा की एक महिला के साथ हुई थी। दोनों ही सरकारी टीचर हैं। शादी के कुछ साल बाद 1997 में दोनों की पोस्टिंग अलग-अलग जगह हो गई, जिसके कारण पत्नी बच्चों के साथ अलग रहने लगी।

इसी दौरान 1997 में पति ने बिना तलाक लिए एक अन्य महिला के साथ नाता कर लिया और दूसरी महिला को पत्नी की तरह अपने साथ रखा, जिससे उसके तीन बच्चे भी हुए।

पति ने अपनी इस गलती को खुलेआम स्वीकारते हुए आधार कार्ड में भी पत्नी के रूप में दूसरी पत्नी अनिता का नाम दर्ज करवा लिया।

इसके बाद पति ने राजसमंद फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी लगाते हुए दावा किया कि उसकी पहली पत्नी ने बिना कारण उसको छोड़ दिया है और लंबे समय तक अलग रहकर क्रूरता की है। गत 24 मई 2023 को पारिवारिक अदालत ने पति की यह अर्जी खारिज कर दी थी।

हाई कोर्ट में पति के वकील ने तर्क दिया कि पत्नी ने 2021 में दहेज प्रताड़ना का मुकदमा दर्ज करवाया था, जिसमें पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट (एफआईआर) लगा दी थी। इसे पति ने मानसिक क्रूरता बताया।

वहीं, पत्नी के वकील ने तर्क दिया कि पति ने दूसरी महिला के साथ नाता किया, जिसके कारण ही पत्नी को अलग रहने पर मजबूर होना पड़ा।

कोर्ट ने कहा कि जब पति खुलेआम दूसरी महिला को पत्नी मानकर रह रहा है तो पहली पत्नी द्वारा साथ रहने से इनकार करना या पुलिस में शिकायत करना क्रूरता नहीं, बल्कि एक न्यायोचित प्रतिक्रिया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पहली पत्नी से तलाक लिए बगैर दूसरी शादी शून्य है।

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