पाकिस्तान की एक आतंकवाद-रोधी अदालत (ATC) ने पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के चार वरिष्ठ नेताओं को 9 मई 2023 के दंगों से जुड़े एक मामले में 10-10 साल की जेल की सजा सुनाई है। वहीं, पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी सहित 11 अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया।
लाहौर की आतंकवाद-रोधी अदालत के न्यायाधीश मंजर अली गिल ने यह फैसला सुनाया। मामला 9 मई 2023 को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद भड़की हिंसा के दौरान मुगलपुरा क्षेत्र में पुलिस वाहनों पर हमले और उन्हें आग लगाने से जुड़ा था।
किन नेताओं को मिली सजा?
अदालत ने जिन चार नेताओं को दोषी ठहराया, उनमें शामिल हैं…
पूर्व पंजाब गवर्नर ओमर सरफराज चीमा
पूर्व पंजाब स्वास्थ्य मंत्री डॉ. यास्मीन राशिद
पूर्व पंजाब मंत्री मियां महमूदुर रशीद
पूर्व सीनेटर एजाज चौधरी
ये सभी नेता 2023 से लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद हैं और मई 2023 की हिंसा से जुड़े अन्य मामलों में भी सजा पा चुके हैं।
शाह महमूद कुरैशी को राहत
अदालत ने पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी और 11 अन्य पीटीआई कार्यकर्ताओं को यह कहते हुए बरी कर दिया कि उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं। हालांकि कुरैशी अभी भी अन्य मामलों में जेल में बंद हैं और 2023 से हिरासत में हैं।
फैसले पर पीटीआई का विरोध
पीटीआई ने अदालत के फैसले को खारिज करते हुए मामले को “मनगढ़ंत” बताया और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए।
पार्टी ने एक बयान में कहा कि इस फैसले से न्यायिक निष्पक्षता, उचित प्रक्रिया और सुनवाई की पारदर्शिता को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा होती हैं। पीटीआई का दावा है कि कुछ आरोपित उस समय पाकिस्तान में मौजूद ही नहीं थे, जब कथित घटनाएं हुईं।
पार्टी ने आरोप लगाया कि मुकदमे की कार्यवाही राजनीतिक दबाव, लंबी हिरासत, सीमित कानूनी पहुंच और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन वाले माहौल में चली। पीटीआई ने कहा कि वह इस फैसले को कानूनी और संवैधानिक मंचों पर चुनौती देगी।
क्या है 9 मई 2023 का मामला?
9 मई 2023 को इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद पाकिस्तान के कई हिस्सों में हिंसक प्रदर्शन भड़क उठे थे। प्रदर्शनकारियों ने पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा समेत कई क्षेत्रों में सैन्य प्रतिष्ठानों, सरकारी इमारतों और पुलिस संपत्तियों को निशाना बनाया था।