New Zealand में बड़ा साइबर हमला, जिंदा मरीजों को ‘मृत’ दिखाया गया; नाम बदलकर ‘चार्ली किर्क’ किया गया, जांच जारी…

न्यूजीलैंड के हेल्थ सेक्टर में एक बड़ा साइबर अटैक हुआ है। मेडिमैप नाम का प्लेटफॉर्म हैक हो गया। इस प्लेटफॉर्म पर मरीजों की दवाइयों का रीयल-टाइम रिकॉर्ड रखा जाता है।

यह प्लेटफॉर्म बुजुर्गों की देखभाल, डिसेबिलिटी सर्विसेज, हॉस्पिस और कम्युनिटी हेल्थ में इस्तेमाल होता है।

हैकर्स ने कुछ जिंदा मरीजों को ‘मृत’ दिखा दिया और कई मरीजों के नाम बदलकर अमेरिकी कंजर्वेटिव एक्टिविस्ट चार्ली कर्क कर दिए। गौरतलब है कि चार्ली की 2025 में अमेरिका में गोली मारकर हत्या हो गई थी।

यह हैक इतना गंभीर था कि कई एज्ड केयर होम्स को दवाइयों का रिकॉर्ड पेपर पर वापस करना पड़ा।

मेडिमैप ने हैक की पुष्टि की

मेडिमैप कंपनी ने हैक की बात मान ली है। कंपनी के डायरेक्टर ज्योफ्री सेयर ने कहा कि जांच में पता चला है कि मरीजों की डेमोग्राफिक जानकारी जैसे नाम, जन्मतिथि, डॉक्टर का नाम, केयर लोकेशन और रेजिडेंट स्टेटस प्रभावित हुई है।

कंपनी ने तुरंत प्लेटफॉर्म को मेंटेनेंस मोड में डाल दिया और बाहर के साइबर एक्सपर्ट्स की मदद ली। उनका फोकस पहले मरीजों की सुरक्षित देखभाल जारी रखना है, फिर सिस्टम को ठीक करना और सुरक्षित तरीके से वापस लाना है।

कैसे हुआ हैक?

जानकारी के मुताबिक, हैकर ने किसी वैध यूजर के लॉगिन क्रेडेंशियल्स चुराए और सिस्टम में घुसकर मरीजों के डेटा को बदल दिया। कुछ मरीजों की उम्र बदल दी गई, कुछ को अलग-अलग फैसिलिटी में शिफ्ट दिखाया गया।

यह कोई रैनसम मनी मांगने वाला अटैक नहीं लगता, बल्कि जानबूझकर अफरा-तफरी मचाने जैसा काम था। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अन्य पॉलिटिशियंस के नाम भी इस्तेमाल किए गए, जिससे ‘हैक्टिविस्ट’ मोटिव की बात उठ रही है।

मेडिमैप की शुरुआत 2012 में क्राइस्टचर्च के फार्मासिस्ट ग्रेग गैरेट ने की थी, ताकि पेपर बेस्ड पुरानी सिस्टम को बदला जा सके। 2023 में यह ऑस्ट्रेलियाई कंपनी Z सॉफ्टवेयर के साथ मर्ज हो गई थी।

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