सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद बड़ा बदलाव, अब तेजाब पीड़ितों को मिलेगा दिव्यांगता का लाभ…

एसिड अटैक… एक ऐसा भयानक और बर्बर अपराध है जो न सिर्फ किसी का चेहरा, बल्कि पूरी जिंदगी झुलसा देता है। लेकिन क्या कोई उस दर्द की कल्पना कर सकता है, जब किसी को जबरन तेजाब पिला दिया जाए?

बाहर से कोई घाव न दिखे, पर अंदर पूरा शरीर छलनी हो चुका हो। अब तक ऐसे पीड़ित न्याय और सरकारी योजनाओं के अधिकार से वंचित रह जाते थे क्योंकि उनकी चोटें दिखाई नहीं देती थीं। लेकिन अब न्याय प्रणाली और सरकार ने इस अदृश्य दर्द को न सिर्फ महसूस किया है, बल्कि कानून में एक ऐतिहासिक बदलाव भी किया है।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि ‘दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016’ में एक बड़ा संशोधन किया गया है। अब इस कानून के तहत उन एसिड अटैक पीड़ितों को भी सभी सरकारी लाभ और कल्याणकारी योजनाएं मिलेंगी, जो जबरन तेजाब पिलाए जाने के कारण गंभीर अंदरूनी चोटों का शिकार हुए हैं, भले ही उनके शरीर पर बाहर से कोई विकृति न दिखती हो।

शाहीन मलिक की याचिका और सुप्रीम कोर्ट का मानवीय रुख

यह ऐतिहासिक बदलाव एसिड अटैक सर्वाइवर शाहीन मलिक द्वारा दायर एक जनहित याचिका के बाद संभव हो सका है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय द्वारा 22 मई, 2026 को इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई है।

कोर्ट में केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने चीफ जस्टिस (सीजेआइ) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ को बताया कि कानून की अनुसूची में संशोधन कर ‘एसिड अटैक विक्टिम्स’ की परिभाषा को स्पष्ट कर दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि चूंकि यह संशोधन एक स्पष्टीकरण की तरह है, इसलिए इसे साल 2016 से ही प्रभावी माना जाएगा, यानी जब से मूल कानून लागू हुआ था। इसका मतलब है कि बीते सालों में इस दर्द से गुजरने वाले सभी पीड़ित अब इसके दायरे में आएंगे।

बर्बरता के खिलाफ सख्त संदेश: दोषियों की संपत्ति होगी कुर्क

यह मामला सिर्फ दिव्यांगता के लाभ तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने इस बर्बर अपराध की जड़ों पर प्रहार करने की बात कही है। कोर्ट ने साल 2013 के बाद से एसिड हमलों की बढ़ती घटनाओं पर गहरी चिंता जताई और इसे समाज के लिए बेहद गंभीर मुद्दा बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को सुझाव दिया है कि ऐसे जघन्य अपराधों के लिए सजा को और अधिक सख्त किया जाए। साथ ही, निर्दोष साबित करने की जिम्मेदारी भी खुद आरोपित पर डाली जानी चाहिए।

कोर्ट ने एक बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि पीड़ितों के पुनर्वास और मुआवजे के लिए दोषियों की संपत्तियों को कुर्क किया जाना चाहिए। इसके अलावा, बाजार में खुलेआम तेजाब की बिक्री पर सख्त नियंत्रण लगाने और देश की सभी अदालतों को ऐसे मामलों की सुनवाई एक तय समय-सीमा में पूरी करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि पीड़ितों को त्वरित न्याय मिल सके।

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