वेस्ट बैंक पर इजरायल को बड़ा झटका: ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने बस्तियों के उत्पादों पर लगाया प्रतिबंध, 12 देशों का समर्थन; इजरायल-अमेरिका ने जताई नाराजगी…

ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने वेस्ट बैंक में स्थित इजरायली कारखानों-खेतों में पैदा वस्तुओं के आयात पर रोक लगा दी है। कहा है कि यह प्रतिबंध वेस्ट बैंक में इजरायली विस्तार बढ़ने के कारण दो राष्ट्र के सिद्धांत को खतरा पैदा होने के चलते लगाए गए हैं।

इन तीनों देशों के इस प्रतिबंध का 12 अन्य देशों ने समर्थन किया है। जबकि इजरायल में अमेरिका के राजदूत ने इस व्यापार प्रतिबंध की निंदा की है।

फलस्तीनी बहुल वेस्ट बैंक पर इजरायली कब्जे को विश्व समुदाय ने मान्यता नहीं दी है। वहां पर इजरायल यहूदी बस्तियां बसाकर क्षेत्र में जनसंख्या अनुपात बदलने की कोशिश कर रहा है।

इन बस्तियों में ही बने कारखानों में कुछ ऐसी वस्तुओं का उत्पादन होता है जो निर्यात की जाती हैं। ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा ने इन्हीं वस्तुओं के आयात पर रोक लगाई है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह रोक सांकेतिक है लेकिन इससे इजरायल को संदेश दिया गया है कि वह अपनी मनमानी नीतियों के क्रियान्वयन पर रोक लगाए।

ब्रिटिश विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने कहा है कि ब्रिटेन लंबे समय तक अन्याय और शोषण को खत्म करने के लिए केवल बयान नहीं दे सकता है। वह उसे रोकने के लिए प्रयास कर सकता है।

ताजा प्रतिबंध इसी प्रयास में लगाए गए हैं। वेस्ट बैंक में इजरायल का विस्तार स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र के गठन की राह में मुश्किल बढ़ाने वाला है। विदित हो कि मिलिबैंड खुद भी यहूदी हैं।

कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने स्वतंत्र फलस्तीन राष्ट्र के गठन को क्षेत्र और इजरायल के लिए जरूरी बताया है। कहा है कि इससे क्षेत्र में शांति आएगी और फलस्तीनी आबादी के साथ न्याय होगा।

जबकि फ्रांस ने कहा है कि वेस्ट बैंक के इजरायली सेटलरों द्वारा बनाई गई वस्तुओं की खरीद से वहां पर हिंसा बढ़ने की आशंका है। इसलिए वहां की वस्तुओं की खरीद रोकी गई है।

विदित हो कि हाल में आई रिपोर्ट में कहा गया है कि इजरायल सरकार वेस्ट बैंक के उन कट्टर यहूदी सेटलरों की ज्यादा मदद कर रही है जो विस्थापित फलस्तीनियों की जमीन पर कब्जे कर वहां पर खेती या कोई उत्पादन कार्य कर रहे हैं।

विरोध में इजरायल बंद करेगा ब्रिटिश कांसुलेट

ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा के व्यापार प्रतिबंध लगाए जाने की निंदा करते हुए इजरायल ने पूर्व यरुशलम स्थित ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास (कांसुलेट) को बंद करने का निर्णय लिया है। साथ ही अमेरिका की गाजा शांति योजना में ब्रिटेन को भागीदार न बनाने की घोषणा की है।

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