पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अमेरिका के लिए सिर्फ सैन्य मोर्चे पर ही नहीं, हथियारों के भंडार के लिहाज से भी बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के खिलाफ अभियान में अमेरिका अब तक 45 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन गंवा चुका है। यह संख्या अमेरिकी रीपर बेड़े के करीब एक चौथाई के बराबर बताई जा रही है।
अमेरिका को भारी नुकसान
तीन अमेरिकी सूत्रों के अनुसार, इन ड्रोन की कुल कीमत करीब 1.3 अरब डॉलर हो सकती है। हर रीपर ड्रोन की कीमत तीन से पांच करोड़ डॉलर के बीच बताई जाती है।
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन के आंकड़ों में युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिकी सेना के पास करीब 185 रीपर ड्रोन थे। इनमें 165 अमेरिकी वायुसेना और 20 मरीन कॉर्प्स के पास थे। हालांकि, इसमें अमेरिकी खुफिया एजेंसियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ड्रोन शामिल नहीं हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर रीपर ड्रोन होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास गिराए गए हैं। रीपर मुख्य रूप से निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और सटीक हमलों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
यह कोई अत्यधिक तेज गति वाला लड़ाकू विमान नहीं है। इसलिए जब इसे ऐसे इलाके में भेजा जाता है जहां दुश्मन की वायु रक्षा सक्रिय हो, तो जोखिम बढ़ जाता है।
टॉमहॉक और थाड पर भी बढ़ा दबावअमेरिका के सामने दूसरी बड़ी चुनौती लंबी दूरी की मिसाइलों और मिसाइल डिफेंस इंटरसेप्टर का भंडार है।
रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध के पहले ही महीने में अमेरिकी सेना ने करीब 850 टामहाक क्रूज मिसाइलों और 1,000 से ज्यादा पैट्रियट और टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (थाड) इंटरसेप्टर का इस्तेमाल किया।
अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका की मौजूदा उत्पादन क्षमता के आधार पर थाड इंटरसेप्टर की संख्या तेजी से बढ़ाना मुश्किल है। रिपोर्ट में सालाना करीब 96 इंटरसेप्टर की उत्पादन क्षमता का उल्लेख किया गया है।
पेंटागन अगले वर्ष तक 857 और पांच वर्षों में 2600 थाड इंटरसेप्टर तैयार करना चाहता है। एईआई के वरिष्ठ अधिकारी टाड हैरिसन के अनुसार, एक थाड इंटरसेप्टर के निर्माण में करीब तीन साल तक लग सकते हैं। इस तरह 2600 थाड तैयार करने में 27 साल का लंबा समय लग सकता है।