800 करोड़ की ठगी कर फरार हुए कन्हैया गुलाटी व उससे जुड़े लोगों के विरुद्ध ईडी ने जांच शुरू कर दी। ईडी को शक है कि कन्हैया गुलाटी के कैनविज ग्रुप की आड़ में काले धन को सफेद किया गया। इसी आधार पर आंचलिक कार्यालय (लखनऊ) के सहायक निदेशक ओंकार नाथ कश्यप ने 12 लोगों को नोटिस जारी किया है।
बैंक खातों के लेनदेन, मोबाइल फोन डिटेल का ब्योरा जांचा जाएगा। कन्हैया गुलाटी ने ठगी की शुरुआत वर्ष 2007 में की थी। उसने कैनविज नेटवर्क-मार्केटिंग कंपनी बनाकर निवेशकों को झांसा दिया कि तीन-चार वर्ष में धन दोगुना हो जाएगा। मूलधन पर प्रतिमाह ब्याज के तौर पर किस्तें भी मिलेंगी।
बड़ी संख्या में लोगों के रुपये जमा कराने के बाद उसने दूसरा पैंतरा चला कि रुपये जमा करें, जो कैनविज कालोनियों में लगाया जाएगा। इसके बाद किसी को धन दो-तीन गुना करने तो किसी को कालोनी में प्लाट देने का झांसा दिया। कुछ समय तक उसने निवेशकों के धन का कुछ हिस्सा लाभांश के तौर पर दिया। इसके बाद जुलाई 2025 से कंपनी बंद कर दी। इस बीच वह शहर की संपत्तियां बेचकर भाग गया।
उसके विरुद्ध बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत, झारखंड और बिहार में 64 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। पुलिस ने यह प्रकरण आर्थिक अपराध शाखा को सौंपने के लिए पत्राचार किया मगर, अभी जवाब नहीं आया है।
इस बीच ईडी ने जांच शुरू कर दी। 13 मई को आंचलिक कार्यालय से उन 12 लोगों को नोटिस जारी किया गया है जो कैनविज ग्रुप से जुड़े थे। नोटिस में जवाब देने के लिए आंचलिक कार्यालय बुलाया गया। इन लोगों को अपने बैंकों के लेनदेन का ब्योरा, मोबाइल फोन-लैपटाप लेकर पहुंचना है।
कन्हैया गुलाटी को तलाशना चबना चुनौती
कैनविज ग्रुप के मालिक कन्हैया गुलाटी के विरुद्ध पहला मुकदमा वर्ष 2016 में दर्ज हुआ था। उसके बाद भी वह अपनी कंपनियों के नाम पर निवेशकों से रुपये जमा कराता रहा। उस पर दूसरा मुकदमा वर्ष 2017 में दर्ज कराया गया।
पिछले साल उसके फरार होने के बाद मुकदमे दर्ज कराने में तेजी आई। वह अपना मकान-स्कूल बेच चुका है। मुकदमों में कन्हैया के साथ उसके स्वजन भी नामजद हैं, लेकिन सभी फरार हैं।