वाराणसी में दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना का भूमि पूजन, विधायक बोले- ‘221 करोड़ की यह योजना CM योगी का ड्रीम प्रोजेक्ट’…

दालमंडी मार्ग चौड़ीकरण परियोजना ने आज एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। सावन के पवित्र माह में, प्रदोष से पहले रविवार को, शहर दक्षिणी विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने चौक प्रवेश मार्ग पर मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से भूमि पूजन किया।

इस पूजन में विश्वेश्वर वार्ड के पार्षद और नगर निगम सदन में प्रस्ताव रखने वाले पार्षद इन्द्रेश भी उपस्थित रहे। भूमि पूजन के बाद अब दालमंडी में सड़क निर्माण कार्य आरंभ होगा। चौक से नई सड़क तक जाने वाले इस 650 मीटर लंबे मार्ग को 17.4 मीटर चौड़ा किया जाएगा। इसकी अनुमानित लागत लगभग 221 करोड़ रुपये है।

इस परियोजना के दायरे में 184 इमारतें थीं, जिनमें 181 भवन और 6 मस्जिदें शामिल थीं। इनका ध्वस्तीकरण लगभग एक वर्ष में 150 करोड़ रुपये के मुआवजे के साथ किया गया। यूपी पुलिस ने भी चौक थाने का एक हिस्सा इस परियोजना में शामिल किया था।

भूमि पूजन के बाद, विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि काशी में प्रधानमंत्री ने अब तक 85 हजार करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ किया है। इनमें कई ऐतिहासिक परियोजनाएं शामिल हैं। दालमंडी भी उन्हीं में से एक है।

उन्होंने आगे कहा कि यह सड़क केवल 650 मीटर की है, लेकिन यह श्रद्धालुओं और व्यापारियों के लिए एक सुगम मार्ग प्रदान करेगी। इससे मन्दिर तक गाड़ियों की पहुंच आसान हो जाएगी। दालमंडी परियोजना को विपक्षी दलों ने कई बार बदनाम करने का प्रयास किया, लेकिन दालमंडी के निवासियों ने आदरणीय प्रधानमंत्री जी के संकल्प के साथ अपने को जोड़ा और आज यह परियोजना मूर्त रूप ले चुकी है। अब केवल निर्माण कार्य शेष है।

इस परियोजना के माध्यम से न केवल यातायात की सुविधा बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। दालमंडी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण से यातायात की भीड़भाड़ कम होगी और श्रद्धालुओं को मन्दिर तक पहुँचने में आसानी होगी। यह परियोजना वाराणसी के विकास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

इस भूमि पूजन समारोह में उपस्थित सभी लोगों ने इस परियोजना के प्रति अपनी खुशी और समर्थन व्यक्त किया। विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने कहा कि यह परियोजना काशी के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे स्थानीय निवासियों को भी लाभ होगा।दालमंडी चौड़ीकरण परियोजना का यह भूमि पूजन न केवल एक धार्मिक अवसर था, बल्कि यह वाराणसी के विकास के लिए एक नई शुरुआत भी है। 

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