बेंगलुरु का ‘डायमंड लोटस’ अंतरिक्ष की उड़ान को तैयार, कला और तकनीक का होगा अनूठा संगम…

सदियों से भारत की संस्कृति, दर्शन, कल्पना और यहां तक कि राजनीति में खिलने वाला कमल अब एक कहीं अधिक असाधारण यात्रा की तैयारी कर रहा है।

सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो बेंगलुरु स्थित उद्यमी संजना टी और उनकी कंपनी कॉस्मोस डायमंड्स द्वारा बनाया गया शानदार हीरों का कमल स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 रॉकेट से अंतरिक्ष की यात्रा करेगा। यह पृथ्वी के पार भेजे जाने वाले भारत के सबसे अनूठे पेलोड में से एक होगा।

कॉस्मिक ब्लूम नामक यह कलाकृति कोई साधारण आभूषण नहीं है। यह 32 लैब-ग्रोन पियर-कट हीरों से सावधानीपूर्वक तैयार किया गया कमल है, जिसका कुल वजन 16.95 कैरेट है। इन हीरों को सोने में जड़ा गया है और एक एल्युमीनियम प्लेट पर सुरक्षित किया गया है, जिसे रॉकेट लॉन्च की अत्यधिक दबाव वाली परिस्थितियों से बचने के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है। लगभग 10 लाख रुपये मूल्य की यह कलाकृति कला, तकनीक, उद्यमशीलता और अंतरिक्ष अन्वेषण का एक अद्भुत संगम है।

कमल को ही क्यों चुना गया?

कमल का चुनाव बेहद सोच-समझकर किया गया था। सदियों से इस फूल का भारतीय सभ्यता, मंदिरों, शास्त्रों, कला और पौराणिक कथाओं में एक विशेष स्थान रहा है। भारतीय परंपरा अक्सर इस फूल को निर्माण, पवित्रता और ज्ञान से जोड़ती है।

कॉस्मिक ब्लूम के निर्माताओं के अनुसार, कमल को इसलिए चुना गया क्योंकि यह भारत के सबसे स्थायी प्रतीकों में से एक है। साथ ही, कुछ भारतीय पौराणिक कथाओं में तो स्वयं ब्रह्मांड की उत्पत्ति भी कमल से ही बताई गई है।

एक निजी कहानी से हुई शुरुआत

हीरों के इस कमल की यात्रा एक बेहद निजी कहानी से शुरू हुई। कॉस्मोस डायमंड्स का विचार 2020 में तब पैदा हुआ जब संस्थापक संजना टी अपनी शादी के लिए आभूषण तलाश रही थीं। इस दौरान उन्हें काफी निराशा हुई। उन्होंने देखा कि हीरों की कीमतें हर दुकान में अलग थीं, पारदर्शिता की कमी थी, और वह पारंपरिक रूप से खनन किए गए कुछ हीरों के इतिहास को लेकर असहज थीं।

एक उद्यमी परिवार से आने और रिसर्च व डिज़ाइन की पृष्ठभूमि होने के कारण, उन्होंने इसमें न केवल एक समस्या देखी, बल्कि एक अवसर भी खोज लिया। इसी अनुभव से भारत के शुरुआती लैब-ग्रोन डायमंड ब्रांड्स में से एक का जन्म हुआ।

टेस्ट-ट्यूब बेबी की तरह हैं ये हीरे

कॉस्मोस डायमंड्स का तर्क है कि लैब में विकसित हीरे खदान से निकले हीरों की तरह ही असली होते हैं। कंपनी के अनुसार, ये दिखने में, भौतिक और संरचनात्मक रूप से प्राकृतिक हीरों के बिल्कुल समान हैं। कंपनी इनकी तुलना टेस्ट-ट्यूब बेबी से करती है।

उनका कहना है कि जिस तरह असिस्टेड रिप्रोडक्शन के जरिए पैदा हुआ बच्चा किसी भी तरह से कम इंसान नहीं होता, वैसे ही लैब में विकसित हीरा जमीन से निकले हीरे से कम असली नहीं होता। कॉस्मिक ब्लूम में इस्तेमाल किए गए हीरे टाइप IIa श्रेणी के हैं, जो उपलब्ध हीरों का सबसे शुद्ध रूप माने जाते हैं।

स्काईरूट का मिशन आगमन और विक्रम-1 रॉकेट

यह कमल हैदराबाद स्थित स्काईरूट एयरोस्पेस द्वारा निर्मित भारत के पहले निजी ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल विक्रम-1 पर सवार होकर अंतरिक्ष में जाएगा। इस मिशन का नाम मिशन आगमन रखा गया है, जो अंतरिक्ष उड़ान में भारत के निजी क्षेत्र की शानदार एंट्री का प्रतीक है। स्काईरूट एयरोस्पेस पहले ही 2022 में विक्रम-एस रॉकेट के सफल प्रक्षेपण के साथ इतिहास रच चुका है।

इसके संस्थापक और इसरो के पूर्व वैज्ञानिक पवन कुमार चंदना और नागा भरत डाका ने विक्रम-1 को एक ऐसा कमर्शियल रॉकेट बनाया है, जो सैटेलाइट और पेलोड को लो अर्थ ऑर्बिट में ले जाने में सक्षम है। विक्रम-1 एक चार चरणों वाला रॉकेट है, जिसके पहले तीन चरणों में सॉलिड प्रोपल्शन और ऊपरी चरण में लिक्विड प्रोपल्शन का उपयोग होता है।

भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र की ऊंची उड़ान

रॉकेट के इस पहले मिशन में तकनीक प्रदर्शन, वैज्ञानिक पेलोड और प्रतीकात्मक कलाकृतियों का मिश्रण भेजे जाने की उम्मीद है। इनमें कॉस्मिक ब्लूम सबसे अलग है, क्योंकि यह भारत की सांस्कृतिक पहचान को उभरती हुई निजी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ता है।

आज स्टार्टअप्स रॉकेट, रोबोटिक सिस्टम, लघु कलाकृतियां और यहां तक कि अंतरिक्ष के लिए डायमंड ज्वेलरी भी बना रहे हैं। संजना के शब्दों में, अगर सब कुछ ठीक रहा, तो हीरे का एक कमल अंतरिक्ष में विराजमान होकर पूरे ब्रह्मांड को निहारेगा।

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