‘असली पार्टी तय करने से पहले अयोग्यता पर निष्पक्ष फैसला जरूरी’, सुप्रीम कोर्ट में उद्धव गुट की दलील…

सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना की असली पहचान और चुनाव चिह्न “धनुष-बाण” को लेकर चल रही कानूनी जंग में उद्धव ठाकरे गुट ने एक अहम रुख अपनाया है।

उद्धव गुट की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने शीर्ष अदालत की विशेष पीठ के समक्ष यह पुरजोर दलील दी कि चुनाव आयोग द्वारा यह निर्धारित किए जाने से पहले कि कौन सा गुट असल राजनीतिक दल है, बागी विधायकों के खिलाफ लंबित अयोग्यता कार्यवाही पर निष्पक्ष निर्णय होना अनिवार्य है।

न्यायालय में सुनवाई के दौरान यह बात प्रमुखता से रखी गई कि यदि वे बागी विधायक अंततः अयोग्य ठहराए जाते हैं, तो सदन के भीतर उनके संख्या बल को पूरी तरह से नजरअंदाज किया जाना चाहिए।

उद्धव गुट का तर्क है कि चुनाव आयोग और महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष ने एक खतरनाक मिसाल पेश करते हुए केवल “विधायिका के बहुमत” को ही “राजनीतिक दल” मान लिया, जो कि कानूनी रूप से गलत और भ्रामक है।

सिब्बल ने यह भी रेखांकित किया कि व्हिप की अवहेलना और अन्य उल्लंघनों के कारण बागी विधायकों की संख्या शुरुआती 16 से बढ़कर अंततः 39 तक पहुंच गई थी। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के उस निर्णय पर गंभीर सवाल उठाए, जिसमें 2018 के पार्टी संविधान को दरकिनार कर दिया गया था।

उन्होंने कहा कि पार्टी के “पक्ष-प्रमुख” उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने चुनाव लड़ा था, इसलिए केवल कुछ विधायकों के बगावत कर लेने भर से संगठनात्मक ढांचे के अधिकार खत्म नहीं हो जाते। सुप्रीम कोर्ट में इस महत्वपूर्ण मामले पर आगे की सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *