आरबीआई बैंकिंग सिस्टम में पांच अरब डॉलर की नकदी डालेगा। इसके लिए 26 मई को डॉलर-रुपये की खरीद-बिक्री स्वैप नीलामी आयोजित की जाएगी।
आरबीआई द्वारा यह दकम ऐसे समय में उठाया जा रहा है, जब वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच डॉलर के मुकाबले रुपया काफी कमजोर हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सेंट्रल बैंक की यह कवायद (डॉलर-रुपये स्वैपिंग) विदेशी मुद्रा बचाने और रुपये को मजबूत करने के लिए कर रहा है।
इस व्यवस्था के तहत बैंक आरबीआई को डॉलर बेचेंगे और बदले में उन्हें रुपये में मिलेंगे। स्वैप की अवधि यानी तीन साल खत्म होने के बाद बैंक आरबीआई को समान राशि के रुपये वापस देकर अपने डॉलर दोबारा खरीद लेंगे।
केंद्रीय बैंक के मुताबिक, इस स्वैप ऑक्शन में न्यूनतम बोली एक करोड़ डॉलर की होगी और इसके बाद एक करोड़ डॉलर के गुणांक में बोली लगाई जा सकेगी।