कोलकाता में ‘बांग्ला पक्ष’ के संस्थापक गार्गा चटर्जी गिरफ्तार, EVM पर अफवाह फैलाने और लोगों को भड़काने का आरोप…

कोलकाता में बांग्ला पक्ष के संस्थापक और इंडियन स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट (ISI) के असिस्टेंट प्रोफेसर गार्गा चटर्जी को कोर्ट ने चार दिनों के लिए पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है । दरअसल, उन्हें एक दिन पहले भड़काऊ टिप्पणी करने, EVM के बारे में अफवाहें फैलाने और अशांति भड़काने की कोशिश करने के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था।

गार्गा चटर्जी, जो कि ISI के मनोविज्ञान विभाग में फैकल्टी सदस्य हैं। उन्होंने दावा किया कि, उन्हें बंगालियों की ओर से बोलने के लिए फंसाया जा रहा है। अदालत ले जाते समय उन्होंने कहा, “सच बोलना बंगालियों के लिए अपराध नहीं हो सकता और बंगालियों की आवाज को दबाया जा रहा है।”

जांच में सहयोग नहीं करने पर हुई गिरफ्तारी

जानकारी के अनुसार, चटर्जी को कोलकाता पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को गिरफ्तार किया था। पांच दिनों की हिरासत मांगते हुए पुलिस ने अदालत को बताया कि, कई बार समन भेजे जाने के बावजूद उन्होंने जांच में सहयोग नहीं किया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जांच के दायरे में आई फेसबुक प्रोफाइल को डीएक्टिवेट करने की कोशिश की गई थी, हालांकि बाद में उसे फिर से एक्टिवेट कर दिया गया।

जांचकर्ताओं ने इसे सबूतों से छेड़छाड़ का संभावित प्रमाण बताया। अभियोजन पक्ष ने आगे दावा किया कि पुलिस की छापेमारी के दौरान चटर्जी अपने घर पर नहीं मिले, और इसलिए उन्हें फरार माना गया। आरोपों से इनकार करते हुए चटर्जी ने कहा कि उन्होंने पुलिस को सूचित कर दिया था कि वे 14 मई को समन का जवाब देंगे।

सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देना संवैधानिक अधिकार: सांसद

उन्होंने आगे कहा पुलिस हिरासत की जरूरत पर सवाल उठाया, और कहा कि उनके सभी डिजिटल उपकरण पहले ही जब्त किए जा चुके हैं। इस गिरफ्तारी पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं।

TMC के पूर्व राज्यसभा सांसद जवाहर सरकार ने कहा, “मैं गार्गा के अतिवादी विचारों और संकीर्ण सोच से सहमत नहीं हूं, लेकिन सरकार को अमेरिका में रहे एक जाने-माने भारतीय विद्वान को गिरफ्तार करने से पहले अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकार पर विचार करना चाहिए।”

सांसद ने आगे कहा, जब तक पुलिस शस्त्र अधिनियम के उल्लंघन या राजद्रोह के आरोपों को बिना किसी संदेह के साबित नहीं कर देती, तब तक उन्हें निष्पक्ष सुनवाई के लिए रिहा किया जाना चाहिए। वहीं, शहर पुलिस मुख्यालय ने बताया कि कोलकाता उत्तर के जिला चुनाव अधिकारी से एक शिकायत मिली थी।

कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का लगा आरोप

यह शिकायत चटर्जी द्वारा किए गए एक फेसबुक पोस्ट के बारे में थी, जिसमें दावा किया गया था कि नेताजी इंडोर स्टेडियम में रखी EVM मशीनों के साथ छेड़छाड़ की गई है, और राजनीतिक समूहों और जनता से विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया गया था। पुलिस ने कहा कि इस पोस्ट में सार्वजनिक अशांति भड़काने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की क्षमता थी।

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