बालोद : चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ से प्रभावित फसलों का संयुक्त सर्वेक्षण जारी, 10,400 किसानों ने टोल-फ्री नंबर पर दी नुकसान की सूचना…

कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के संवेदनशील नेतृत्व एवं निर्देशानुसार प्रभावित किसानों को राहत दिलाने की पहल

चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के कारण फसलों को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए जिले में कृषि विभाग एवं फसल बीमा कंपनी की संयुक्त टीम द्वारा सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के संवेदनशील नेतृत्व में उनके निर्देशानुसार प्रभावित किसानों को शासन की फसल बीमा योजना के तहत नियमानुसार राहत दिलाने के लिए सर्वेक्षण कार्य प्राथमिकता से किया जा रहा है।

इसी कड़ी में ग्राम भरदाकला, सिब्दी, जेवरतला एवं बोडेना में राजस्व कृषि विस्तार अधिकारी, फसल बीमा ब्लॉक कोऑर्डिनेटर, जनपद सदस्य प्रतिनिधि, सरपंच एवं संबंधित कृषकों की उपस्थिति में संयुक्त रूप से फसल क्षति का सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान प्रभावित खेतों का निरीक्षण कर फसलों को हुए नुकसान का आकलन किया गया। सर्वेक्षण में जनप्रतिनिधियों एवं किसानों की सहभागिता से नुकसान की स्थिति का जायजा लिया गया, ताकि वास्तविक क्षति का सही आकलन किया जा सके।

कृषि विभाग के उप संचालक ने बताया कि जिले के 10,400 किसानों ने फसल बीमा टोल-फ्री नंबर 14447 पर फसल क्षति की सूचना दी है। इन सूचनाओं के आधार पर कृषि विभाग एवं बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों द्वारा 31 अक्टूबर 2026 से खेतों का सर्वेक्षण प्रारंभ किया गया है।

कृषि विभाग के अनुसार, फसल कटाई के बाद खेतों में सुखाने के लिए फैलाकर रखी गई अथवा छोटे बंडलों में रखी गई अधिसूचित फसल को प्राकृतिक आपदा जैसे ओलावृष्टि, चक्रवात, चक्रवाती वर्षा एवं बेमौसम बारिश से नुकसान होने पर प्रभावित किसानों को फसल बीमा योजना के तहत राहत प्रदान करने का प्रावधान है।

शासन के निर्देशानुसार बीमा कंपनियों को सूचना प्राप्त होने के 10 दिनों के भीतर सर्वेक्षण पूरा कर नुकसान का आकलन करने तथा पात्र किसानों को दावा राशि का भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं। जिले की सभी तहसीलों में सर्वेक्षण कार्य जारी है। अब तक 5,971 किसानों के खेतों का सर्वेक्षण पूरा कर लिया गया है। शेष किसानों के खेतों का सर्वेक्षण भी तेजी से किया जा रहा है।

जिला प्रशासन द्वारा सर्वेक्षण कार्य की निरंतर निगरानी की जा रही है, ताकि प्रभावित एवं पात्र किसानों को फसल क्षति का उचित आकलन कर नियमानुसार बीमा दावा राशि का लाभ समय पर मिल सके।

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