सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राकांपा नेता और पूर्व विधायक बाबा सिद्दीकी की हत्या के आरोपित आकाशदीप करज ¨सह को दी गई जमानत में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि पिछले महीने हाई कोर्ट का आदेश तर्कसंगत था।
जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने बाबा सिद्दीकी की पत्नी शहजीन जियाउद्दीन सिद्दीकी द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि नौ फरवरी के हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
पीठ ने सिद्दीकी की पत्नी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता नित्या रामकृष्णन से कहा कि यह एक तर्कसंगत फैसला है, हर किसी को एक ही तराजू पर नहीं तौला जा सकता। इस व्यक्ति का इस अपराध से कोई संबंध नहीं है।
रामकृष्णन ने आरोप लगाया कि आकाशदीप के संबंध लारेंस बिश्नोई गिरोह से थे, जो अभियोजन पक्ष के अनुसार, सिद्दीकी की हत्या से जुड़ा था।
हालांकि, पीठ ने बताया कि हाई कोर्ट पहले ही रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री की जांच कर चुका है और आकाशदीप की संलिप्तता साबित करने के लिए इसे अपर्याप्त पाया है।
जब महाराष्ट्र सरकार के वकील ने पीठ को बताया कि वे भी जमानत को चुनौती देंगे, तो पीठ ने टिप्पणी की, अब चूंकि मृतक की पत्नी हमारे सामने मौजूद है, इसलिए राज्य भी अपनी नींद से जाग गया है।