भारत की गन्ना नीति पर ऑस्ट्रेलिया को आपत्ति, घरेलू सब्सिडी को लेकर WTO से मांगा स्पष्टीकरण…

 ऑस्ट्रेलिया ने भारत की घरेलू गन्ना और चीनी नीतियों को लेकर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में स्पष्टीकरण मांगा है।

उसने दावा किया है कि भारत ने 2018-19 से 2024-25 के दौरान सात वर्षों में गन्ने के लिए डब्ल्यूटीओ नियमों के तहत तय सीमा से काफी अधिक समर्थन दिया।

डब्ल्यूटीओ के कृषि समझौते (एओए) के तहत इस तरह का समर्थन गन्ने के कुल उत्पादन मूल्य के 10 प्रतिशत तक सीमित रखा गया है।

भारत सरकार हर चीनी सत्र में गन्ने के लिए उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) तय करती है। यह मूल्य प्रभावी रूप से चीनी मिलों द्वारा किसानों को गन्ने के लिए भुगतान की जाने वाली न्यूनतम कीमत के रूप में काम करता है।

ऑस्ट्रेलिया का कहना है कि गन्ना किसानों को उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए प्रीमियम भी दिया जाता है। इसके अलावा, कुछ राज्यों में किसानों को चीनी मिलों से राज्य सरकारों द्वारा तय अतिरिक्त कीमत यानी राज्य परामर्शित मूल्य (एसएपी) के तहत भुगतान मिलता है।

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