असम के जोरहट से बड़े पैमाने पर फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए केंद्रीय विभागों में नौकरियां हथियाने वाले एक बहुत बड़े अंतर-राज्यीय भर्ती घोटाले का सनसनीखेज खुलासा हुआ है।
दूसरे राज्यों के उम्मीदवार जोरहाट के नाओशोलिया गांव के फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्र (पीआरसी), जाली जाति और आय प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल कर सीआरपीएफ, सीआईएसएफ और असम राइफल्स जैसे केंद्रीय सुरक्षा बलों में नौकरियां हासिल कर लीं।
यह घोटाला हाल ही में जोरहाट के नौशोलिया गांव से सामने आया है जहां कथित तौर पर जाली निवास प्रमाण पत्र बनाए गए और अन्य राज्यों के उम्मीदवारों द्वारा उनका इस्तेमाल किया गया। जांच में पता चला है कि कई व्यक्तियों ने इन फर्जी दस्तावेजों को प्रस्तुत करके असम के कोटे के तहत केंद्र सरकार की नौकरियां प्राप्त कीं।
अन्य हिस्सों में फैला हो सकता है रैकेट
अधिकारियों को अंदेशा है कि यह रैकेट सिर्फ जोरहाट तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के अन्य हिस्सों में भी फैला हो सकता है, जिसने स्थानीय और योग्य असमिया युवाओं के रोजगार के अवसरों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
जोरहाट के अतिरिक्त उपायुक्त पंकज बोरा के प्रयासों से इन धोखाधड़ी वाली गतिविधियों का पर्दाफाश हुआ। इस खुलासे ने अधिकारियों और आम जनता दोनों को स्तब्ध कर दिया है।
इक्नोमिक्स टाइम ने सूत्रों के हवाले से बताया कि नाओशोलिया गांव के फर्जी स्थायी निवास प्रमाण पत्रों के साथ-साथ जाली जाति और आय प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल सीआरपीएफ, असम राइफल्स और सीआईएसएफ जैसी संस्थाओं में नौकरी पाने के लिए किया गया था।
जांच के दायरे में आए व्यक्तियों ने नाओशोलिया गांव से जुड़े फर्जी आवासीय दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। इन उम्मीदवारों द्वारा प्रस्तुत जाति और आय प्रमाण पत्र मूल रूप से असम के अलग-अलग व्यक्तियों के नाम पर जारी किए गए थे। प्रमाण पत्र संख्या और संबंधित दस्तावेजों के सत्यापन के माध्यम से इस पूरे धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है।
किसने की मदद ?
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि असम के इन जाली सरकारी दस्तावेजों को तैयार करने और उन्हें बाहरी उम्मीदवारों तक पहुंचाने के पीछे असली ‘मास्टरमाइंड’ कौन है? कयास लगाए जा रहे हैं कि इस खेल के पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क या फिर व्यवस्था से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी शह पर यह रैकेट फल-फूल रहा था।
जांच एजेंसियों की सुई इस बात पर भी टिकी है कि जालसाजों ने आखिर नाओशोलिया गांव को ही अपना गढ़ क्यों चुना? क्योंकि यह गांव उन सैन्य और अर्धसैनिक प्रतिष्ठानों के बेहद करीब है, जहां विभिन्न केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान तैनात हैं और अक्सर किराए के मकानों में रहते हैं। आशंका जताई जा रही है कि अपराधियों ने इसी भौगोलिक स्थिति और माहौल का फायदा उठाकर इतनी बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया।