अब चांद तक के आधे से ज्यादा सफर तय करने के बाद Artemis II के चार अंतरिक्ष यात्री अपनी चंद्र परिक्रमा की तैयारी शुरू कर दी है। यह मिशन अपोलो कार्यक्रम के बाद पहली बार इंसानों को चांद के इतने करीब और उससे आगे ले जा रहा है।
मिशन के शुरू होने के कुछ घंटों बाद ओरियन कैप्सूल का टॉयलेट खराब हो गया था। क्रू को पेशाब के लिए बैकअप बैग्स इस्तेमाल करने पड़े। इंजीनियरों को संदेह था कि फैन या कंट्रोलर में समस्या या बर्फ की खराबी हो सकती है।
बाथरूम से हल्की बदबू की शिकायत
हालांकि, शौच के लिए टॉयलेट इस्तेमाल किया जा सकता था। अंतरिक्ष यात्रियों ने बाथरूम से हल्की बदबू की भी शिकायत की। यह बाथरूम कैप्सूल के फर्श में बना है, जिसमें प्राइवेसी के लिए दरवाजा और पर्दा लगा हुआ है।
क्रू ने मिशन कंट्रोल के साथ मिलकर समस्या का निदान किया और टॉयलेट को सामान्य स्थिति में बहाल कर दिया। अब यह पूरी तरह काम कर रहा है। नासा ने सलाह दी कि इस्तेमाल से पहले सिस्टम को स्पीड पर आने दें और बाद में थोड़ी देर चलने दें।
चांद के करीब पहुंच रहे यात्री
तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री सोमवार, 6 अप्रैल को चांद के बेहद करीब पहुंचने वाले हैं। वे चांद के चारों ओर चक्कर लगाते हुए उसके रहस्यमयी दूर वाले हिस्से की तस्वीरें लेंगे। पायलट विक्टर ग्लोवर ने बताया कि पृथ्वी काफी छोटी दिख रही है, और चांद निश्चित रूप से बड़ा होता जा रहा है।
यह 53 साल से ज्यादा समय बाद चांद के आस-पास जाने वाला पहला क्रूड मिशन है, जो NASA का Apollo प्रोग्राम 1972 में रुका था। यह मिशन पृथ्वी से लगभग 400,000 किलोमीटर से भी दूर तक जाएगा, जो अपोलो 13 का मौजूदा रिकॉर्ड तोड़ेगा।
कब पूरा होगा मिशन
यह लगभग 10 दिन का मिशन 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में कैप्सूल के उतरने के साथ पूरा होगा। ओरियन चांद की कक्षा में नहीं जाएगा, बल्कि चांद के पीछे से यू-टर्न लेकर सीधे पृथ्वी की ओर लौट आएगा। मिशन NASA की महत्वाकांक्षी योजनाओं का पहला कदम है। 2028 तक चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास दो अंतरिक्ष यात्रियों को उतारने का लक्ष्य है।