भविष्य के जंग के लिए सेना की नई तैयारी, क्वांटम तकनीक से लैस होगी इंडियम आर्मी; भारत के दुश्मनों की अब खैर नहीं…

भारत की तीनों सेनाओं- थल सेना, नौसेना और वायु सेना- को भविष्य के युद्ध के लिए तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है।

चीफ आफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने गुरुवार को ‘मिलिट्री क्वांटम मिशन पालिसी फ्रेमवर्क’ नामक एक महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी किया।

यह दस्तावेज सेना में क्वांटम तकनीकों को चरणबद्ध तरीके से शामिल करने की नीति और रोडमैप तय करता है।रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह नीति दस्तावेज चार प्रमुख क्वांटम तकनीकों को सेना में जोड़ने पर केंद्रित है।

इनमें क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलाजी, तथा क्वांटम सामग्री और उपकरण शामिल हैं।

इन अत्याधुनिक तकनीकों से सेना की संचार व्यवस्था अधिक सुरक्षित होगी, दुश्मन की गतिविधियों का पता लगाने की क्षमता बढ़ेगी और जटिल गणनाएं बहुत तेजी से की जा सकेंगी।क्वांटम तकनीकें सेना को ज्यादा तेज, ज्यादा सुरक्षित और ज्यादा सटीक बनाएंगी।

क्या है क्वाटम तकनीक?

उदाहरण के लिए, क्वांटम कम्युनिकेशन से ऐसा सुरक्षित संदेश भेजा जा सकेगा जिसे हैक करना लगभग नामुमकिन होगा। वहीं, क्वांटम सें¨सग की मदद से दुश्मन की मौजूदगी, पनडुब्बियों या मिसाइलों का पता पहले से लगाया जा सकेगा।

यह नीति राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अनुरूप तैयार की गई है, जिसमें रक्षा क्षेत्र एक अहम हिस्सा है।

दस्तावेज में यह भी बताया गया है कि नागरिक और सैन्य क्षेत्रों के बीच सहयोग (सिविल-मिलिट्री फ्यूजन) के जरिए इन तकनीकों को तेजी से अपनाया जाएगा।

इसके लिए अलग-अलग सरकारी विभागों के विशेषज्ञों को शामिल करते हुए विशेष संस्थागत ढांचे बनाए जाएंगे।नीति में इस बात पर खास जोर दिया गया है कि तीनों सेनाएं मिलकर-यानी आपसी तालमेल और संयुक्त प्रयासों के साथ-इन तकनीकों को अपनाएं।

इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और भविष्य के युद्धक्षेत्र में भारत को तकनीकी बढ़त हासिल हो सकेगी।

इस अवसर पर नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी, थल सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी ¨सह और चीफ आफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित भी मौजूद थे।

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